

Gwalior Murar District Hospital Condition: ग्वालियर के माधवराव सिंधिया मुरार जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। अस्पताल की ओपीडी बिल्डिंग बाहर से साफ-सुथरी और व्यवस्थित नजर आती है, लेकिन पीछे के हिस्से में तस्वीर बिल्कुल अलग दिखाई देती है।
ऑक्सीजन प्लांट के पास खुले में कचरे का बड़ा ढेर लगा हुआ है। यहां प्लास्टिक की बोतलें, पॉलीथिन, खाने-पीने का वेस्ट, दवाइयों के खाली डिब्बे और सूखे पत्ते समेत अन्य कचरा पड़ा है।
मुरार जिला अस्पताल की मुख्य बिल्डिंग के पीछे कचरे का ढेर दिखाई दे रहा है। कचरे के बीच दोने-पत्तल और प्लास्टिक सामग्री भी बिखरी हुई है। इसके ठीक पास गंदा पानी जमा है, जिसमें काई जमी हुई है। आसपास तेज दुर्गंध भी बनी हुई है। बरसात के मौसम में इस पानी के बहकर अस्पताल परिसर के दूसरे हिस्सों तक पहुंचने की आशंका है।
अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिजनों ने सफाई व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि गंदगी और दुर्गंध के कारण अस्पताल में रहना मुश्किल हो रहा है। मरीजों के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से सफाई व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है और यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है।
अस्पताल परिसर में कचरा और गंदा पानी जमा होने के कारण संक्रमण के खतरे को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खासतौर पर अस्पताल में पहले से बीमार मरीजों की मौजूदगी को देखते हुए सफाई व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है। बरसात के दौरान जमा पानी के फैलने से समस्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
मामले में अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जिस स्थान पर कचरा जमा है, वह मरीजों के आवागमन वाले हिस्से से दूर है और बायोमेडिकल वेस्ट के लिए निर्धारित स्थान है। प्रबंधन के मुताबिक पूरे अस्पताल से कचरा एकत्र कर यहां रखा जाता है और एजेंसी के ट्रैक्टर से इसे रोज उठवाया जाता है। ट्रैक्टर के आने में देरी के कारण कचरा जमा हुआ था। प्रबंधन ने बताया कि फिलहाल सफाई का काम कराया जा रहा है और दावा किया कि निर्धारित स्थान मरीजों से दूर होने के कारण संक्रमण का खतरा नहीं है।