Nashik Leopard Attacks ( सोर्स : शोसल मीडिया )
Nashik Forest Department Fund: नासिक जिले में बढ़ते मानव-तेंदुआ संघर्ष को थामने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। जिला नियोजन समिति ने वन विभाग के लिए 20 करोड़ रुपये का विशेष फंड मंजूर किया है। इस निश्चि का उपयोग विशेष रेस्क्यू टीम, आधुनिक तकनीक और सुरक्षा उपकरणों की खरीद के लिए किया जाएगा।
प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि यह पूरा फंड 31 मार्च तक खर्च करना अनिवार्य है। पिछले एक साल में नासिक शहर और ग्रामीण इलाकों में तेंदुए के हमले तेजी से बढ़े हैं। पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, जिले के 120 से अधिक गांवों में तेंदुए इंसानों पर हमले कर चुके हैं।
अकेले पिछले एक साल में 10 से अधिक बच्चों और वयस्कों पर जानलेवा हमले हुए हैं। इसी गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी आयुष प्रसाद ने बजट का पुनर्विनियोजन कर वन विभाग को यह बड़ी राशि आवंटित की है।
वन विभाग ने सुरक्षा के लिए जो खाका तैयार किया है, उसमें आधुनिक उपकरणों पर जोर दिया गया है। आरआरटी 30 विशेष टीमें बनाई जाएंगी (प्रत्येक टीम में 6 सदस्य), जिनके लिए 53 लाख से अधिक का प्रावधान है।
16 नए बधाव वाहनों के लिए 2.40 करोड़ रुपये, ड्रोन, जीपीएस, नाइट विजन टॉर्च और ट्रैप कैमरों के लिए लगभग 2 करोड़ रुपये 20 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कैमरे लगाए जाएंगे 60 लाख रुपये), जी तेंदुए की गतिविधि को तुरत पहचान सकेंगे, चिजरो और प्राथमिक कार्रवाई दल के लिए 6.50 करोड, जबकि बड़ी जालियों के लिए 24 लाख रुपये खर्च होंगे।
विभागीय आयुक्त डॉ. प्रवीण गेडाम की मंजूरी के बाद यह निधि जारी की गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्त होने में अब एक महीने से भी कम समय बचा है, इसलिए वन विभाग को 31 मार्च से पहले खरीद प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
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इस निधि के अलावा, शेष राशि में से 9 करोड़ जिला अस्पताल को एम्बुलेस और दवाओं के लिए, जबकि 1 करोड सुरगाणा तहसील के स्वास्थ्य केंद्रों की मरम्मत के लिए दिए गए है।
पिंजरे : 6.50 करोड़ रुपये।
रेस्क्यू वाहन: 2.40 करोड रुपये।
ड्रोन व तकनीक: 1.98 करोड़ रुपये।
एआई कैमरे: 60 लाख रुपये।
जन जागरुकता: 70 लाख रुपये।