मरीजों को अपनी फार्मेसी से दवा खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेंगे अस्पताल; एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे का आदेश
Tukaram Mundhe Decision Hospital Monopoly: अस्पतालों की मनमानी पर आईएएस तुकाराम मुंढे का बड़ा फैसला। मरीज अब अंदर की फार्मेसी से दवा लेने को मजबूर नहीं होंगे, बाहर से दवा खरीदने की मिलेगी पूरी आजादी।
- Written By: गोरक्ष पोफली
तुकाराम मुंढे (सोर्स: सोशल मीडिया)
IAS Tukaram Mundhe FDA Order: महाराष्ट्र के सबसे चर्चित और कड़क मिजाज अधिकारियों में शुमार, एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने एक बार फिर आम जनता के हक में एक बड़ा फैसला सुनाया है। मीडिया से मुखातिब होते हुए मुंढे ने अस्पतालों की उस मोनोपॉली को तोड़ने का आदेश जारी किया है, जिसके तहत मरीजों को अस्पताल के अंदर स्थित मेडिकल स्टोर से ही महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किया जाता था।
मरीज का अधिकार, अस्पताल की मजबूरी नहीं
आईएएस तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने एक नया आदेश पारित किया है, जो सीधे तौर पर मरीजों के अधिकारों की रक्षा करता है। उन्होंने कहा, हॉस्पिटल किसी भी पेशेंट को यह मजबूर नहीं कर सकता कि दवाएं उनके ही फार्मेसी से खरीदी जाएं। यह नागरिक और पेशेंट का अधिकार है कि वह दवा कहां से खरीदना चाहता है। अब अस्पतालों को अनिवार्य रूप से मरीज को प्रिस्क्रिप्शन देना होगा, जिसे लेकर मरीज अपनी पसंद की किसी भी दुकान से दवाएं खरीद सकेगा।
ब्रांड नेम और जेनेरिक दवाओं के खेल पर नजर
मीडिया से बातचीत के दौरान जब उनसे दवाओं की उपलब्धता और डॉक्टरों द्वारा लिखे जाने वाले खास ‘ब्रांड नेम’ पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर विषय है। अक्सर देखा जाता है कि डॉक्टर कंटेंट के बजाय ब्रांड का नाम लिखते हैं, जो केवल अस्पताल की फार्मेसी में ही उपलब्ध होता है। इस पर मुंढे ने चेतावनी देते हुए कहा, अगर खाद्य एवं औषधि प्रशासन पास इस तरह की कोई विशिष्ट शिकायत आती है, तो हम कानून के तहत सख्त कार्रवाई करेंगे।
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सिर्फ आदेश नहीं, होगी कड़ी जांच
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने साफ कर दिया कि ड्रग विभाग के तहत आने वाले इन मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि प्रिस्क्रिप्शन लिखने का तरीका उनके डोमेन में नहीं आता, लेकिन दवाओं की बिक्री और मरीजों को मजबूर करने वाली शिकायतों पर वे निश्चित रूप से जांच बिठाएंगे।
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आम आदमी को बड़ी राहत
मुंढे के इस ‘दबंग’ फैसले से उन लाखों परिवारों को राहत मिलेगी जो अस्पताल के भारी-भरकम बिल के साथ-साथ महंगी दवाओं के बोझ तले दबे रहते थे। अब अगर कोई अस्पताल किसी मरीज को अंदर से ही दवा लेने का दबाव बनाता है, तो एफडीए उस पर कानूनी हंटर चलाने के लिए तैयार है। जैसा कि मुंढे ने कहा, आप पेशेंट को फोर्स नहीं कर सकते।
