

Purohit Sangh Dharma Dhwaja Tradition Nashik: देशभर में मुख्य रूप से चार जगह प्रयागराज हरिद्वार उज्जैन और नासिक में कुंभ का आयोजन होता है लेकिन हर जगह का अपना अलग-अलग महत्व है तो अलग-अलग परंपरा कुंभ स्थल के पौराणिक ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को दर्शाते हैं। प्रयागराज उज्जैन और हरिद्वार से अलग हटकर नासिक में कुछ ऐसा होता है कि जो अन्य कुंभ स्थलों पर देखने को नहीं मिलता उसमें से एक है धर्म ध्वज की पुरोहित संघ के द्वारा स्थापित किया जाना।
नासिक में वैष्णो संप्रदाय के कुंभ स्नान स्थल गोदावरी रामकुंड तपोवन और सन्यासियों के कुंभ स्नान स्थल त्रंबकेश्वर कुसावर्त कुंड में कुंभ का आगाज प्रशासन और पुरोहित संघ के संयुक्त आयोजन धर्म ध्वज की स्थापना से होता है। जबकि अन्य तीन जगहो पर सभी पंथ संप्रदाय के अखाड़े मैं अपने वैदिक रीति रिवाज से धर्म ध्वज की स्थापना की जाती है और उसके बाद ही उनका छावनी प्रवेश होता है।
नासिक सिंहस्थ में पुरोहित संघ के द्वारा धर्म ध्वजा की स्थापना की परंपरा कब और कैसे पड़ी इसका कोई प्रमाणित उल्लेख तो नहीं मिलता लेकिन पुरोहित संघ बताता है कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है जिसे आज भी पुरोहित संघ के द्वारा उसी विधि विधान के साथ उत्साह पूर्वक गरिमापुर माहौल में निभाई जा रही है।
प्रयागराज हरिद्वार और उज्जैन मैं कुंभ के आयोजन के दौरान प्रमुख भूमिका में अखाड़े और उनसे जुड़े महंत अध्यक्ष छोटे-छोटे आयोजनों में भी मुख्य भूमिका में रहते हैं लेकिन नासिक एक ऐसा इकलौता उदाहरण है जहां पर कुंभ के आगाज के प्रतीक के रूप में स्थापित होने वाले त्र्यंबकेश्वर और नासिक में धर्म ध्वजा के समारोह में सभी अखाड़े और उनके महंत अध्यक्ष मेहमान के रूप में मौजूद रहते हैं और पूरे आयोजन के मेजबान पुरोहित संघ और प्रशासन होता है।
बताया जाता है कि यही कारण है कि नासिक में कुंभ के धर्म ध्वजा की स्थापना को लेकर अखाड़े और पुरोहित संघ के बीच में टकराहट की आहट दिखाई देने लगती है। और इस टकराहट की गूंज 31 अक्टूबर को धर्म ध्वज की स्थापना के पहले अभी से सुनाई भी पडने लगी है।
पुरोहित संघ के द्वारा नासिक और त्र्यंबकेश्वर मंदिर में संघर्ष तो कुंभ के आगाज के लिए जिस धर्म ध्वज की स्थापना की जाती है उसमें कई कल्याणकारी शुभकारी और मंगलकारी प्रतीक चिन्ह जैसे सूर्य चंद्रमा बुध सिंह स्वास्तिक और कुंभ का सबसे शुभ प्रतीक कुंभ कलश बना हुआ होता है।