युद्ध का असर: इंटरनेशनल संघर्ष से नासिक के अंगूर निर्यात पर संकट, कंटेनर पोर्ट से लौटे
Nashik Grape Export Crisis: ईरान-इजराइल-अमेरिका संघर्ष का असर नासिक के अंगूर निर्यात पर पड़ा है। जेएनपीटी से दुबई भेजा गया 13 टन अंगूर का कंटेनर रास्ता बंद होने से वापस निफाड़ लौट आया।
- Written By: अंकिता पटेल
Nashik Grape Export Crisis ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Iran Israel US Conflict Trade Impact: नासिक दुनिया भर में फैली युद्ध की आग का सीधा असर अब नासिक के अंगूर उगाने वालों और एक्सपोर्ट करने वालों पर पड़ रहा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने इंटरनेशनल वॉटरवे को रोक दिया है।
इस वजह से नासिक के मीठे अंगूर विदेशी बाजारों में पहुंचने से पहले ही पोर्ट पर अटक गए हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि नवी मुंबई के जेएनपीटी पोर्ट से भेजे गए कई कंटेनर अब वापस लौटने लगे हैं।
अंगूरों का गढ़ कहे जाने वाले निफाड़ तहसील की तस्वीर चिंताजनक हो गई है, और करोड़ों रुपये के निवेश पर सीधा खतरा पैदा हो गया है। पिछले 10 दिनों से इंटरनेशनल बुद्ध जैसे हालात की वजह से भारतीय एक्सपोर्ट पर असर पड़ा है।
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नासिक से दुबई के लिए निकला अंगूर का एक बड़ा कंटेनर युद्ध की वजह से हुई मुश्किलों की वजह से निफाड़ वापस आ गया है। 13 मौट्रिक टन अंगूर से भरे कंटेनर को अब निफाड़ तहसील के सांगले एग्रो प्रोसेस कोल्ड स्टोरेज में दोबारा उतारना पड़ा है।
अंगूर इंडस्ट्री पर मंडरा रहा है बड़ा आर्थिक संकट
मौजूदा हालात की वजह से शिपिंग कंपनियों ने वॉर रिस्क चार्ज लगा दिया है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन का खर्च काफी बढ़ गया है। चूंकि अंगूर जल्दी खराब होने वाला फल है, इसलिए इसे समय पर कस्टमर तक पहुंचाना जरूरी है, लेकिन एक्सपोर्टर अक्षय सागले ने डर जताया है कि इस देरी से माल खराब हो जाएगा, कंटेनर के वापस आने से न सिर्फ आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि स्टोरेज की भी बड़ी समस्या हो रही है।
कोल्ड स्टोरेज में पहले से ही अंगूर का बड़ा स्टॉक है, लेकिन वापस आए माल से अब कैपेसिटी पर भारी दबाव पड़ रहा है। नासिक जिला दुनिया का सबसे बड़ा अंगूर उत्पादक है।
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हर साल यहां से हजारों टन अंगूर यूरोप और खाड़ी देशों में एक्सपोर्ट किए जाते हैं। लेकिन, पिछले साल हुई बेमौसम बारिश की वजह से प्रोडक्शन में पहले ही बढ़ी गिरावट आ गई थी।
अब, जबकि किसान संभल रहे है, युद्ध के हालात ने उनकी मुश्किले और बढ़ा दी है। अगर यह युद्ध के हालात जल्द खत्म नहीं हुए, तो अनुमान है कि नासिक की अंगूर इंडस्ट्री को करोड़ों रुपये का नुकसान होगा।
