कुंभ से पहले गोदावरी की जंग: जलकुंभी हटाने 43 लाख का प्लान, 15 ग्राम पंचायतों को मिलेंगी नावें

Nashik Godavari Cleaning: सिंहस्थ कुंभ से पहले गोदावरी की सफाई बड़ी चुनौती बनी है। जलकुंभी हटाने के लिए जिला परिषद ने 43 लाख का नया प्रस्ताव तैयार किया है।
Battle for the Godavari before Kumbh Mela: Rs 43 lakh plan to remove water hyacinths, 15 gram panchayats to receive boats.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Nashik Kumbh Mela Sanitation Drive: नासिक आगामी सिंहस्थ कुंभमेले के मद्देनजर गोदावरी नदी की स्वच्छता प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। कुंभमेले में देश-विदेश से आने वाले साधु-संतों और श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल में स्नान का अनुभव मिले, इसके लिए जिला परिषद ने गोदावरी से जलकुंभी (पानवेली) हटाने के लिए 43 लाख रुपये का एक नया प्रस्ताव तैयार किया है।

गोदावरी की स्वच्छता को लेकर नासिक के जिलाधिकारी आयुष प्रसाद ने जिला परिषद को ठोस कार्ययोजना पेश करने के निर्देश दिए थे। इसी के तहत ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने एक प्रस्ताव तैयार किया है। गोदावरी के तट पर स्थित नासिक और निफाड तहसील की 15 ग्राम पंचायतों को एक-एक नाव उपलब्ध कराई जाएगी।

इन नावों पर बैठकर कर्मचारी नदी के भीतर फैली जलकुंभी को निकालेंगे। इस पूरी परियोजना पर करीब 43 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। पिछली विफलताओं से उठ रहे सवाल नदी से जलकुंभी निकालने का मुद्दा नासिक में हमेशा से विवादित रहा है।

इससे पहले नासिक महानगरपालिका ने मशीनों के जरिए जलकुंभी हटाने का प्रयास किया था, लेकिन वे मशीनें खुद जलकुंभी के जाल में फंसकर नाकाम हो गई। जिला परिषद ने दो साल पहले महिला बचत समूहों के माध्यम से जलकुंभी से वस्तुएं बनाने का प्रशिक्षण भी दिया था, जिस पर लाखों रुपये खर्च हुए, लेकिन वह प्रयोग भी सफल नहीं रहा।

औद्योगिक और रिहायशी सांडपाणी मुख्य जड़

ऐसे में अब 43 लाख की 'नाव' वाला यह नया प्रस्ताव कितना कारगर होगा, इस पर सवालिया निशान लगा हुआ है। गोदावरी में नासिक शहर की औद्योगिक बस्तियों और रिहायशी इलाकों का सांडपाणी सीधे नदी में मिलता है, जिससे नासिक से लेकर निफाड के नांदूर मध्यमेश्वर तक जलकुंभी का घना जाल बिछा रहता है।

हालांकि, स्वच्छ भारत मिशन के तहत 15 गांवी में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए गए है, लेकिन जलकुंभी की समस्या जस की तस बनी हुई है, प्रशासन का मानना है कि कुंभमेले में यदि नदी गंदी रही, तो श्रद्धालुओं और साधु-संतो का भारी रोष झेलना पड़ सकता है।

गोदावरी स्वच्छता अभियान के मुख्य बिंदु

कुंभमेले के दौरान साधु-सतों की स्वच्छ स्नान उपलब्ध कराना, नासिक और निफाड तहसील के 15 प्रमुख गांव, मशीनों की विफलता के बाद अब मानवीय बम (नाव के जरिए) पर भरोसा।

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