

नाशिक जिले में कुल 18,01,897 पशुधन होने का अनुमान।
वर्तमान में उपलब्ध 53,977 टन चारा करीब 127 दिनों के लिए पर्याप्त बताया गया।
चारा बीजों के लिए ₹3 करोड़ का प्रावधान।
17,160 लाभार्थियों को विभिन्न प्रकार के चारा बीज वितरित किए जाएंगे।
बाजार समितियों, सहकारी संस्थाओं और बचत समूहों के माध्यम से चारा बैंक बनाने की योजना।
Nashik Fodder Bank Livestock Management: नासिक जिले में संभावित चारा संकट से निपटने के लिए प्रशासन ने जून 2027 तक की कार्ययोजना तैयार की है। जिले के 18.01 लाख पशुधन के लिए मौजूदा चारा करीब 127 दिनों तक पर्याप्त बताया गया है। चारा उत्पादन बढ़ाने, बीज वितरण, मुरघास बनाने और बाजार समितियों व बचत समूहों के माध्यम से चारा बैंक स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा।
नासिक, बदलते मौसम, बारिश की अनिश्चितता और गर्मियों में चारे की बढ़ती जरूरत को देखते हुए नासिकजिला प्रशासन ने संभावित चारा संकट से निपटने के लिए जून 2027 तक की समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की है। इसका उद्देश्य जिले के पशुधन को पर्याप्त चारा और पीने का पानी उपलब्ध कराना तथा चारे की कमी की स्थिति को रोकना है।
जिलाधिकारी आयुष प्रसाद के अनुसार, पशुसंवर्धन विभाग के माध्यम से चारा उत्पादन बढ़ाने, बीज वितरित करने, चारे का भंडारण करने और मुरघास उत्पादन को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जाएगा। पालकमंत्री गिरीश महाजन ने भी जिला प्रशासन को चारा नियोजन के निर्देश दिए हैं।
नासिक जिले में कुल 18 लाख 1 हजार 897 पशुधन दर्ज होने की जानकारी दी गई है। इसके लिए हर महीने करीब 7,393 टन चारे की आवश्यकता बताई गई है, जबकि वर्तमान में उपलब्ध चारे का भंडार 53,977 टन है। प्रशासन के अनुसार, यह मात्रा लगभग 127 दिनों तक पर्याप्त हो सकती है।
भविष्य में चारे की कमी से बचने के लिए ग्राम स्तर पर पशुधन की संख्या, चारे की जरूरत और उपलब्ध संसाधनों का आकलन किया जाएगा। अक्टूबर 2026 में गांवों की कार्ययोजनाएं तैयार करने, चारा बीजों की मांग निर्धारित करने और सर्वेक्षण पर जोर रहेगा।
चारा फसलों की बुवाई के लिए अतिरिक्त बीज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से योजना में ₹3 करोड़ का प्रावधान किया गया है। जिले के 17,160 लाभार्थियों को विभिन्न प्रकार के चारा बीज वितरित करने की योजना है।
नवंबर में रबी मौसम की चारा बुवाई की योजना तैयार की जाएगी। दिसंबर में खेतों की तैयारी और चारा फसलों की बुवाई पर ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए किसान उत्पादक कंपनियों और संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के साथ समन्वय किया जाएगा।
कृषि उपज बाजार समितियों, सहकारी संस्थाओं और बचत समूहों के माध्यम से चारा बैंक स्थापित करने की योजना है। इन बैंकों में चारा संग्रहित और सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि जरूरत के समय उसका वितरण किया जा सके।
जनवरी-फरवरी 2027 में चारा फसलों की कटाई, मुरघास उत्पादन और उपलब्ध चारे के नियोजित वितरण पर ध्यान दिया जाएगा। मार्च से जून 2027 के दौरान गर्मियों में चारा उगाने, सूखे चारे का भंडारण और जरूरत के अनुसार प्रबंधन के उपाय किए जाएंगे।
इसके अलावा एजोला और हाइड्रोपोनिक तकनीक से चारा उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि समय रहते चारा उत्पादन और भंडारण की व्यवस्था मजबूत कर गर्मियों में पशुधन के लिए चारे की उपलब्धता बनाए रखी जाए।