

मनपा स्कूलों के पुस्तकालयों के लिए 8,500 पुस्तकें दान की गईं।
सरस्वती भुवन संस्था हर महीने 1,100 पुस्तकें उपलब्ध कराएगी।
आयुक्त अमोल येडगे के निर्देश पर पुस्तकालय विकसित किए जा रहे हैं।
विद्यार्थियों और शिक्षकों की लिखी रचनाएं भी पुस्तकों में शामिल हैं।
मनपा स्कूलों के विद्यार्थियों की कविताएं प्रकाशित करने की योजना है।
Chhatrapati Sambhajinagar Saraswati Bhuvan Book Donation: छत्रपति संभाजीनगर में सरस्वती भुवन शिक्षा संस्था ने मनपा स्कूलों के पुस्तकालयों के लिए 8,500 पुस्तकें दान की हैं। संस्था हर महीने 1,100 और पुस्तकें उपलब्ध कराएगी। पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करना और उनकी लेखन प्रतिभा को प्रोत्साहित करना है।
छत्रपति संभाजीनगर, महानगरपालिका के स्कूलों में विद्यार्थियों के बीच पढ़ने की आदत विकसित करने और उनकी लेखन प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए सरस्वती भुवन शिक्षा संस्था ने महत्वपूर्ण पहल की है। संस्था की ओर से मनपा स्कूलों के पुस्तकालयों के लिए 8,500 पुस्तकें दान की गई हैं। साथ ही भविष्य में हर महीने 1,100 पुस्तकें उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।
इस पहल से विद्यार्थियों को ज्ञानवर्धक साहित्य पढ़ने का अवसर मिलेगा। साथ ही उनमें किताबों के प्रति रुचि बढ़ाने और अपनी रचनात्मक प्रतिभा को सामने लाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मनपा के शिक्षा विभाग की ओर से हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे नागरी लोककल्याण अभियान के अंतर्गत यह पहल की जा रही है। मनपा आयुक्त अमोल येडगे के निर्देश पर स्कूलों में पुस्तकालय विकसित किए जा रहे हैं, ताकि विद्यार्थियों को नियमित रूप से पढ़ने के लिए उपयोगी पुस्तकें उपलब्ध हो सकें।
मनपा के आह्वान पर सरस्वती भुवन शिक्षा संस्था ने इस अभियान में सहयोग दिया। संस्था की सहसचिव डॉ. रश्मि बोरीकर ने 8,500 पुस्तकें आयुक्त अमोल येडगे को सौंपीं। उन्होंने आगे भी हर महीने 1,100 पुस्तकें उपलब्ध कराने की जानकारी दी।
इस अवसर पर उप आयुक्त अंकुश पांढरे, कार्यक्रम अधिकारी ज्ञानदेव सांगले और सरस्वती भुवन शिक्षा संस्था के अभिजीत देशमुख उपस्थित थे।
पुस्तकों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की ओर से लिखी गई रचनाएं भी शामिल हैं। इससे विद्यार्थियों को लेखन के प्रति प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। मनपा स्कूलों के कई विद्यार्थी पहले से ही कविताएं लिख रहे हैं। उनकी प्रतिभा को मंच देने के लिए इन कविताओं को भी पुस्तकों में प्रकाशित करने की योजना बनाई जा रही है।
इस पहल के जरिए विद्यार्थियों को केवल पुस्तकें पढ़ने ही नहीं, बल्कि अपनी कल्पनाओं और विचारों को शब्दों में व्यक्त करने का अवसर भी मिलेगा। नियमित पुस्तक उपलब्धता और विद्यार्थियों की रचनाओं को स्थान देने से स्कूलों में पढ़ने-लिखने का माहौल मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।