छह लोकतंत्र दिवस बीत गए, फिर भी लंबित हैं शिकायतें; नासिक महानगरपालिका की कार्यशैली पर उठे सवाल
Nashik Democracy Day Complaints: नासिक में लोकतंत्र दिवस पर दर्ज कई शिकायतें महीनों बाद भी लंबित हैं। मनपा प्रशासन की सुस्ती पर सवाल उठ रहे हैं और वरिष्ठ स्तर पर नाराजगी बढ़ गई है।
- Written By: अंकिता पटेल
Nashik Municipal Corporation Negligence( Source: Social Media )
Nashik Municipal Corporation Negligence: नासिक विभागीय लोकतंत्र दिवस के अवसर पर प्राप्त शिकायतों के निवारण में नासिक महानगरपालिका (मनपा) की सुस्ती और उदासीनता का मामला अब गरमा गया है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जून 2025 से अब तक छह बार लोकतंत्र दिवस का आयोजन हो चुका है, लेकिन मनपा प्रशासन कई गंभीर शिकायतों को सुलझाने में पूरी तरह विफल रहा है।
शिकायतों के अंबार और अधिकारियों के टालमटोल वाले रवैये ने अब वरिष्ठ स्तर पर नाराजगी पैदा कर दी है। शिकायत निवारण की समीक्षा के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि 30 जून 2025 की रिपोर्ट में शामिल कई मामले आज भी जस के तस बने हुए हैं।
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लक्ष्मण तुकाराम सुतार, आनंदा विष्णु गांगुर्डे और उमेश गोरधनदास चव्हाण द्वारा दर्ज की गई अवैध निर्माण की शिकायतों पर अब तक कोई ठोस अंतिम कार्रवाई नहीं की गई है।
कोर्ट का स्टे नहीं, फिर भी बुलडोजर क्यों नहीं?
शिकायतों का निपटारा न होने के कारण ये आवेदक हर बार लोकशाही दिन में उपस्थित होकर अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासनिक समीक्षा में यह स्पष्ट किया गया है कि मनपा अक्सर ‘कानूनी मामला लंबित है’ कहकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से बचती है। इस पर सख्त निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी मामले में न्यायालय का कोई स्थगन आदेश या यथास्थिति का आदेश नहीं है, तो केवल कोर्ट में आवेदन लंबित होने के आधार पर कार्रवाई नहीं रोकी जा सकती, लोकशाही दिन शिकायतों के समाधान का मंच है, और प्रशासन को नियमों के दायरे में रहकर कार्रवाई करना अनिवार्य है।
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नासिक मनपा की उस नीति की भी कड़ी आलोचना की गई है, जिसमें अवैध निर्माण हटाने का खर्च पहले जमा करने की शर्त रखी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, अवैध निर्माण करने वाला व्यक्ति खुद इसे हटाने के लिए पैसे भरेगा, इसकी संभावना न के बराबर है।
जिस पीड़ित व्यक्ति को अवैध निर्माण से परेशानी हो रही है, उससे खर्च वसूलना न्यायसंगत नहीं है। इस प्रशासनिक चिफलता और जनता की समस्याओं को लेकर भाजपा ग्रुप लीडर नंदा।
