Naroshankar Temple: नारोशंकर मंदिर में लगेंगे नए गुंबद; सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले मंदिर को मिलेगा भव्य स्वरूप
Nashik Naroshankar Temple: नासिक के ऐतिहासिक नारोशंकर मंदिर में कुंभ मेले से पहले सुंदरीकरण कार्य तेजी से जारी है। मंदिर में तीन नए गुंबद जोड़े जाएंगे, जो इसकी पारंपरिक वास्तुकला को और भव्य बनाएंगे।
- Written By: केतकी मोडक
नारोशंकर मंदिर सोर्स सोशल मीडिया
Nahik Naroshankar Temple: सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के तहत नासिक के प्रसिद्ध नारोशंकर मंदिर के संरक्षण और सुंदरीकरण का कार्य पुरातत्व विभाग द्वारा तेजी से किया जा रहा है।
इस परियोजना के तहत मंदिर में तीन नए गुंबद लगाए जाएंगे, जिससे यहा कुल गुंबदों की संख्या चार हो जाएगी। ये नए गुंबद असली पत्थर के गुंबद की सटीक रेप्लिका (प्रतिकृति) के रूप में तैयार किए गए हैं, जो मंदिर के आकर्षण को और बढ़ाएंगे।
आर्किटेक्चर का नया अध्याय और हेमाडपंती शैली
नारोशंकर मंदिर अपनी विशिष्ट हेमाडपंती शैली के लिए जाना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी मंदिर की शांति और आकर्षण में उसकी वास्तुकला (आर्किटेक्चर) की अहम भूमिका होती है, जिसमें गुंबद एक मुख्य हिस्सा है। गोदाघाट पर स्थित कई मंदिरों में नारोशंकर मंदिर की बनावट को बेजोड़ माना जाता है। मंदिर के प्राचीन ढांचे को पूरी तरह हटाए बिना काम करना एक कठिन चुनौती थी, जिसे विभाग ने बखूबी निभाया है।
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प्राचीन विरासत और बारीकियों का संरक्षण
पुरातत्व विभाग मंदिर की मूल विरासत को बनाए रखने के लिए बेहद बारीकी से काम कर रहा है:
- मंदिर के सामने के पवेलियन (मंडप) पर पारंपरिक आर्किटेक्चरल स्टाइल को बनाए रखते हुए काम किया जा रहा है।
- हर नए एलिमेंट को पुरातत्व विभाग के कड़े नियमों का पालन करते हुए डिजाइन और निर्मित किया गया है।
- गर्भगृह और सभा मंडप के आंतरिक कार्यों को भी विशेषज्ञों की देखरेख में बहुत अच्छे तरीके से पूरा किया गया है।
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समय सीमा और विशेषज्ञ अध्ययन
पुरातत्व विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह सारा काम विस्तृत अध्ययन के बाद ही आगे बढ़ाया गया है। चूंकि यह परियोजना कुंभ मेले की समय सीमा के भीतर पूरी करनी है, इसलिए विभाग ने कम समय में गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के लिए विशेष रणनीति अपनाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस जीर्णोद्धार से नासिक की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को नई मजबूती मिलेगी।
