10 साल में बड़ा बदलाव, महाराष्ट्र के भरतपुर में पेंटेड स्टॉर्क का बसेरा, पर्यटकों के लिए आकर्षण
Nashik Bird Sanctuary: नंदूर मध्यमेश्वर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में पेंटेड स्टॉर्क पक्षियों के 80 घोंसले रिकॉर्ड हुए हैं। 10 साल में इनकी संख्या में बड़ा इजाफा हुआ, पर्यावरण के लिए सकारात्मक संकेत है।
- Written By: अंकिता पटेल
Nashik Nandur Madhyameshwar Sanctuary( Source: Social Media )
Nashik Nandur Madhyameshwar Sanctuary: नासिक महाराष्ट्र का भरतपुर कहे जाने वाले निफाड़ तालुका में नंदूर मध्यमेश्वर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में मेहमान पक्षियों की चहचहाहट बढ़ गई है और दुर्लभ पेंटेड स्टॉर्क (चित्रबलाका) पक्षियों ने एक बड़ा आशियाना बना लिया है।
खास बात यह है कि 2016 में जहां सिर्फ दो घोंसले दिखे थे, वहीं 2026 के इस सीजन में 80 घोंसले रिकॉर्ड किए गए हैं। यह अब तक की सबसे ज्यादा संख्या है। इन घोंसलों में अभी छोटे चूजे हैं और ये पक्षी प्रेमियों और टूरिस्ट के लिए एक बड़ा आकर्षण बन रहे हैं।
सैंक्चुअरी में भरपूर खाना, सुरक्षित रहने की जगह और वन विभाग द्वारा बचाव की वजह से 10 सालों में इन पक्षियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। इसे पर्यावरण बचाव के लिहाज से अहम माना जा रहा है। पहले ये पक्षी खाने की तलाश में या खास मौसम में यहां आते थे।
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दस सालों में सैंक्चुअरी में हालात हुए अच्छे
लेकिन, पिछले दस सालों में सैक्चुअरी में हालात इतने अच्छे हो गए हैं कि ये पक्षी अब यहीं बस गए हैं। विजिटर्स अब यहां के रहने वालों में बदल गए हैं। दूसरे माइग्रेटरी पक्षी सर्दियां खत्म होने के बाद चले जाते हैं, लेकिन पेंटेड स्टॉर्क की मूवमेंट अब पूरे साल दिखती है। इस सैंक्चुअरी में पैदा हुए चूजे अब बड़े होकर वहीं अपने नए घोंसले बना रहे हैं। इस वजह से, यहां उनकी एक पूरी लोकल पौड़ी बन गई है।
माने जाते हैं सुंदरता के प्रतीक, इस पक्षी में क्या हैं खासियतें ?
प्रकृति की कड़ी में एक अहम कड़ी और सुंदरता का प्रतीक, पेटेड स्टॉर्क (चित्रबलाका) अब नांदूर मध्यमेश्वर सैक्चुअरी में सिर्फ एक विजिटर नहीं रहा, बल्कि यहां का परमानेंट रहने वाला बन गया है, ऐसा फॉरेस्ट कंजर्वेटर हेमंत उबाले ने कहा।
पेटेड स्टॉर्क या चित्रबालक अपने आकर्षक रंगों के लिए जाना जाता है। यह भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता है, यह एक बड़ा वॉटरफाउल है और इसका शरीर सफेद होता है, लेकिन इसके पंखों पर काली और सफेद चारियां होती हैं।
इसकी पूछ के पास के पंथा गुलाबी होते हैं, इसीलिए इसे ‘पेंटेड’ स्टॉर्क कहा जाता है। इसकी चौच लंबी, पीली और सिरे पर थोड़ी मुड़ी हुई होती है। यह ज्यादातर मछली खाता है।
इसका शिकार करने का तरीका अलग है। यह अपनी चौच आधी खुली रखकर कम गहरे पानी में धीरे-धीरे चलता है, जैसे ही कोई मछली इररकी चीच से टकराती है, यह इसे जल्दी से बंद कर लेता है।
झुंड में रहना पसंद करते हैं
ये पक्षी झुंड में रहना पसंद करते हैं, एक ही पेड़ पर कई घोंसले हो सकते हैं। ये घोंसले पेड़ों की ऊंची डालियों पर लकड़ियों से बनते हैं। नर और मादा मिलकर घोंसले बनाते हैं। हालांकि ये पक्षी पूरी तरह से माइग्रेटरी नहीं हैं, लेकिन खाने और पानी की मौजूदगी के आधार पर ये आस-पास ही लंबी दूरी तय करते हैं।
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10 सालों में चौसलों की संख्या में बढ़ोतरी यह साबित करती है कि अगर हम प्रकृति के लिए अच्छा माहौल दें, तो खतरे में पड़ी प्रजातियां भी खुद को फिर से बसा सकती है चित्रबलाका के स्वथ-साथ राखी हेरॉन, पर्पल हेरॉन, नाइट हेरॉन, लिटिल हेरॉन, आर्चर, लिटिल लीफ को और बिग लीफ-को के घोसले भी इन पेड़ों पर पाए गए हैं और चित्रबालक अब नंदूर मध्यमेश्वर की शान का एक अहम हिस्सा बन गए हैं।
– (फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर) हीरालाल चौधरी
