संसद में नासिक के सांसद का सरकार को सीधा चैलेंज, ‘हिम्मत है तो बिना शर्त लागू करें महिला आरक्षण’
MP Rajabhau Waje: नासिक सांसद राजाभाऊ वाजे ने लोकसभा में महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने पर आपत्ति जताई। उन्होंने इसे महाराष्ट्र जैसे राज्यों को राजनीतिक रूप से कमजोर करने वाला कदम बताया।
- Written By: गोरक्ष पोफली
सांसद राजाभाऊ वाजे (सोर्स: सोशल मीडिया)
MP Rajabhau Waje Lok Sabha Speech: लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा के दौरान नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे ने सरकार की घेराबंदी करते हुए इसे महिलाओं के साथ एक ‘सियासी छलावा’ करार दिया। उन्होंने महिला सशक्तिकरण का समर्थन तो किया, लेकिन आरक्षण को जनगणना और परिसीमन जैसी भविष्य की शर्तों से जोड़ने पर कड़ी आपत्ति जताई।
सांसद वाजे ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार “गुड़ लगाकर चटका देने” की नीति अपना रही है, जहाँ मीठी बातों की आड़ में असल अधिकार को अनिश्चितकाल के लिए टाला जा रहा है। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार की नीयत साफ है, तो इस आरक्षण को आगामी चुनाव से ही वर्तमान सीटों पर तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए।
विकसित राज्यों के खिलाफ ‘राजनीतिक षडयंत्र’
सांसद वाजे ने महाराष्ट्र और दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रति अपने सरोकार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रस्तावित परिसीमन विकसित राज्यों के लिए एक बड़ा खतरा है। उन्होंने सदन को याद दिलाया कि 1971 के बाद सीटों के आवंटन को इसलिए रोका गया था ताकि जनसंख्या नियंत्रण करने वाले जागरूक राज्यों के साथ न्याय हो सके। वाजे ने आरोप लगाया कि नए नियमों के तहत उत्तर भारत की सीटों में भारी वृद्धि होगी, जबकि महाराष्ट्र, तमिलनाडु और केरल जैसे प्रगतिशील राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व और प्रभाव कम हो जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जो राज्य ‘विकसित भारत’ के सपने को सच कर रहे हैं, उन्हें ही राजनीतिक रूप से दंडित क्यों किया जा रहा है?
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परिसीमन को ‘सियासी ढाल’ बनाने का आरोप
सांसद राजाभाऊ वाजे ने अपने संबोधन में एक और गंभीर बिंदु उठाया कि सरकार महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय को एक ‘राजनीतिक ढाल’ की तरह इस्तेमाल कर रही है। उनका तर्क है कि परिसीमन एक अत्यंत विवादास्पद और जटिल प्रक्रिया है, जिससे कई राज्यों का असंतोष जुड़ा हुआ है। ऐसे में सरकार ने महिला आरक्षण को इसके साथ जोड़ दिया है ताकि परिसीमन के विवादास्पद फैसलों को भावनात्मक रूप से सुरक्षित तरीके से पारित कराया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि महिलाओं के अधिकारों की आड़ में राज्यों के राजनीतिक अधिकारों का हनन करना लोकतंत्र के संघीय ढांचे के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।
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न्यायसंगत मानदंडों और पारदर्शिता की मांग
अपने भाषण के समापन में सांसद वाजे ने सरकार के समक्ष स्पष्ट मांगें रखीं और कहा कि किसी भी प्रकार का बदलाव राज्यों की पूर्ण सहमति के बिना नहीं होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं, बल्कि विकास और सामाजिक न्याय के मानदंडों पर आधारित होनी चाहिए। सांसद वाजे ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र की जनता और प्रगतिशील राज्य अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनके इस प्रखर भाषण ने न केवल सदन में हलचल मचा दी, बल्कि देश के राजनीतिक भविष्य और राज्यों के बीच शक्ति संतुलन को लेकर एक गंभीर बहस को भी जन्म दे दिया है।
