नासिक में 1100 जर्जर इमारतें बनीं टाइम बम, नोटिस के भरोसे ढाई हजार जिंदगियां दांव पर; प्रशासन की बड़ी लापरवाही

Nasik Monsoon Crisis: नासिक में मानसून से पहले 1,100 से अधिक जर्जर इमारतें टाइम बम बन चुकी हैं। मनपा के सिर्फ नोटिस जारी करने से ढाई हजार से ज्यादा निवासियों की जान दांव पर लगी है।
Over 1,100 dilapidated buildings in Nasik turn into time bombs before monsoon. NMC's mere notices leave 2,500 residents stranded amid legal disputes.
जर्जर इमारतें (फोटो- सोशल मीडिया)
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Nasik Municipal Corporation Notice Dangerous Buildings: मानसून की आहट के साथ ही नासिक शहर में एक बड़ा मानवीय संकट खड़ा हो गया है। शहर के विभिन्न हिस्सों में स्थित 1,100 से अधिक जर्जर और खतरनाक इमारतें किसी 'टाइम बम' से कम नहीं हैं। नगर नियोजन विभाग द्वारा नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेने के कारण, इनमें रहने वाले ढाई हजार से अधिक निवासी हर पल जान हथेली पर लेकर जीने को मजबूर हैं।

प्रशासन के नोटिस और जमीनी हकीकत

नासिक मनपा प्रशासन ने हर साल की तरह इस बार भी सर्वे कर इमारतों को नोटिस थमा दिए हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। विभागवार खतरनाक इमारतों का विवरण इस प्रकार है।

क्यों बनी है ये खतरनाक स्थिति ?

नासिक के पुराने इलाकों, विशेषकर पश्चिम और पंचवटी में मौजूद 50 से 100 वर्ष पुराने वाड़े अपनी उम्र पूरी कर चुके है। पत्थर, मिट्टी और लकड़ी से बनी ये संरचनाएं मानसून की पहली बारिश झेलने में भी सक्षम नहीं है। सबसे बड़ी बाधा 'स्ट्रक्चरल ऑडिट' की कमी है। नियमानुसार 30 वर्ष से पुरानी इमारतों का ऑडिट अनिवार्य है, लेकिन हजारों इमारतों का ऑडिट अब तक नहीं हुआ है।

कानूनी विवादों में फंसा जीवन

जर्जर इमारतों के खाली न होने के पीछे मकान मालिकों और किराएदारों के बीच का कानूनी संघर्ष एक बड़ी दीवार बन गया है। कोर्ट में वर्षों से लंबित मामलों के कारण न तो मरम्मत हो पा रही है और न ही इमारतें खाली की जा रही है। मनपा ने नोटिस जारी कर यह स्पष्ट कर दिया है कि दुर्घटना होने पर जिम्मेदारी मालिकों या निवासियों की होगी, जिससे जनता में भारी आक्रोश है। नागरिकों का तर्क है कि टैक्स देने के बावजूद प्रशासन सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रहा है।

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