नासिक विधान परिषद: महायुति में 11-4-2 का सीट फॉर्मूला तय, एमवीए का खरीद-फरोख्त का गंभीर आरोप

Nashik MLC Election: महाराष्ट्र विधान परिषद की 17 सीटों के लिए महायुति का फॉर्मूला (BJP-11, ShivSena-4, NCP-2) तय एमवीए नेता रवींद्र मिर्लेकर ने चुनाव में भारी खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया।
Mahayuti finalized its MLC election seat formula with BJP getting 11, Shiv Sena 4, and NCP 2. MVA's Ravindra Mirlekar alleged massive horse-trading in the polls.
नासिक विधान परिषद महायुति (फोटो.सोशल मीडिया)
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Nashik MLC Election Mahayuti Seat Sharing: स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव को लेकर महायुति के भीतर लंबे समय से चल रही रस्साकशी आखिरकार समाप्त हो गई है। सीटों के बंटवारे को लेकर चली चर्चाओं और दावों-प्रतिदावों के बाद महायुति के तीनों घटक दलों के बीच सभी 17 सीटों पर सहमति बन गई है। तय फॉर्मूले के अनुसार भारतीय जनता पार्टी 11 सीटों, शिवसेना 4 सीटों और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी 2 सीटों पर अपने उम्मीदवार मैदान में उतारेगी।

हालांकि सीट बंटवारे पर सहमति बनने के बावजूद कई स्थानों पर बगावत की आशंका बनी हुई है। टिकट नहीं मिलने से नाराज कुछ इच्छुक नेताओं ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया है, जिससे कई निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबला रोचक होने की संभावना है।

इस बीच नासिक सीट पर महाविकास आघाड़ी (एमवीए) की ओर से कोई उम्मीदवार नहीं उतारे जाने का निर्णय चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्ष के इस कदम पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के उपनेता एवं उत्तर महाराष्ट्र समन्वयक रवींद्र मिर्लेकर ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

चुनाव में धनबल व खरीद-फरोख्त का बोलबाला

मिर्लेकर ने आरोप लगाया कि विधान परिषद चुनाव में बड़े पैमाने पर धनबल और कथित तौर पर जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त का माहौल बना हुआ है। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में "घोड़ेबाजार" हावी है और उनकी पार्टी ऐसे माहौल का हिस्सा नहीं बनना चाहती। उन्होंने दावा किया कि धनशक्ति के बढ़ते प्रभाव के कारण लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंच रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महायुति में सीटों के अंतिम बंटवारे के बाद अब चुनावी तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो गई है, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी कई सीटों पर समीकरण बदल सकती है। वहीं नासिक में एमवीए द्वारा उम्मीदवार नहीं उतारने के फैसले ने भी राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दिया है।

अब सभी की निगाहें नामांकन प्रक्रिया और संभावित बागी उम्मीदवारों की भूमिका पर टिकी हैं, जो कई सीटों पर चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।

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