प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोेर्स: सोशल मीडिया )
Malegaon Municipal Election: मालेगांव महानगरपालिका के आम चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होते ही पूरा प्रशासनिक अमला ‘एक्शन मोड’ में आ गया है। चुनाव आयोग के कड़े निर्देशों के बाद आचार संहिता सेल, पुलिस विभाग और राज्य आबकारी विभाग की संयुक्त टीमों ने शहर के चप्पे-चप्पे पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं। इस विशेष अभियान के तहत अवैध शराब और नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों के खिलाफ जबरदस्त कार्रवाई शुरू की गई है।
महानगरपालिका चुनाव की पृष्ठभूमि में चलाए गए प्रिवेंटिव एक्शन में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। अब तक की छापेमारी में शहर के विभिन्न गुप्त ठिकानों से करीब 1,77,260 रुपये की देसी और विदेशी शराब बरामद की गई है।
इसके साथ ही, लगभग 2,000 रुपये के नशीले पदार्थ (ड्रग्स) भी जब्त किए गए हैं। कुल मिलाकर अब तक ढाई लाख रुपये से अधिक की अवैध सामग्री प्रशासन के कब्जे में है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य मतदाताओं को प्रभावित करने वाली किसी भी वस्तु के अवैध वितरण को पूरी तरह रोकना है।
चुनाव को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए मालेगांव नगर निगम में एक समर्पित ‘आचार संहिता सेल’ कार्यरत है। सेल प्रमुख महेश शेलार और सहायक प्रमुख बालू धोंडगे के कुशल नेतृत्व में कुल 28 विशेष टीमें तैनात की गई हैं। इनमें 8 फ्लाइंग स्क्वॉड (उड़न दस्ते) शामिल हैं, जो 24 घंटे सक्रिय हैं।
4 टीमें दिन की पाली में और 4 टीमें रात की पाली में शहर का भ्रमण कर रही हैं। ये टीमें न केवल अवैध सामग्री, बल्कि बड़ी रकम के संदिग्ध लेन-देन और राजनीतिक गतिविधियों पर भी बारीकी से नजर रख रही हैं।
प्रशासन ने शहर के उन सभी संवेदनशील रास्तों को चिन्हित किया है, जहाँ से अवैध सामग्री की आवक होने की संभावना है। गिरणा पुल, टेहरे चौफुली, नामपूर रोड, कुसुंबा रोड, दरेगांव चौक और चंदनपुरी गेट जैसे प्रमुख प्रवेश द्वारों पर अस्थाई चेक पॉइंट बनाए गए हैं। यहाँ तैनात टीमें हर दिन 100 से अधिक गाड़ियों की सघन तलाशी ले रही हैं। संदिग्ध पाए जाने वाले वाहनों और व्यक्तियों के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें अपने आसपास कहीं भी अवैध शराब, नकदी या उपहार वितरण की जानकारी मिलती है, तो वे तुरंत आचार संहिता सेल को सूचित करें। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा। चुनाव आयोग का ‘CVIGIL’ ऐप भी इस दिशा में एक प्रभावी हथियार साबित हो रहा है, जहाँ नागरिक फोटो या वीडियो अपलोड कर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
आचार संहिता केवल जमीन पर ही नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी लागू है। सेल ने एक विशेष ‘मीडिया मॉनिटरिंग यूनिट’ बनाई है, जो उम्मीदवारों के फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर नजर रख रही है।
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भड़काऊ पोस्ट या बिना अनुमति वाले विज्ञापनों पर साइबर सेल के माध्यम से कार्रवाई की जाएगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होने वाले खर्च को भी उम्मीदवार के चुनाव खर्च में जोड़ा जा रहा है।