जल संकट से निपटने को महाराष्ट्र सरकार का ऐतिहासिक कदम; नासिक सहित पूरे राज्य में लागू होगी 'पानी की ऋण पत्रिक

Nashik Water Crisis: जल संकट से निपटने के लिए महाराष्ट्र में 'पानी की ऋण पत्रिका' (वाटर पासबुक) योजना शुरू हो रही है। इसके तहत जीआईएस मैपिंग होगी और पानी बचाने पर 'एक्वा क्रेडिट्स' मिलेंगे।
To tackle water scarcity, Maharashtra introduces the 'Water Passbook' initiative. Featuring GIS mapping and 'Aqua Credits', it aims to digitize and optimize water use.
जल संकट (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Nashik Water Management: सूखा और जल संकट की चुनौतियों से निपटने के लिए अब नासिक सहित पूरे राज्य में जल प्रबंधन का एक नया और वैज्ञानिक तरीका अपनाया जा रहा है। जल संपदा के कुशल प्रबंधन के लिए सरकार ने 'पानी की ऋण पत्रिका' (वाटर पासबुक) तैयार करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य पानी के उपयोग, भंडारण और संरक्षण का पारदर्शी लेखा-जोखा तैयार करना है।

'पानी का सातबारा' और 'एक्वा क्रेडिट्स' की अवधारणा

यह योजना जल स्रोतों के डिजिटल प्रबंधन पर आधारित है जीआईएस तकनीक का उपयोग करके नासिक जिले की सभी नदियों, तालाबों, कुओं और बांधों की डिजिटल मैपिंग की जाएगी। ग्राम पंचायत स्तर पर पानी की उपलब्धता और उपयोग का वार्षिक ब्यौरा रखा जाएगा, जिसे 'पानी का सातबारा' कहा जा रहा है। जो ग्राम पंचायतें, किसान या नागरिक पानी की बचत करेंगे, उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए उनके खातों में 'एक्वा क्रेडिट्स' जमा किए जाएंगे।

पानी की ऋण पत्रिका तीन चरणों में तैयार की जाएगी की जाएगी

प्रथम चरणः उपलब्ध जल पानी की ऋण पत्रिका तीन चरणों में तैयार स्रोतों की सटीक माप और डेटा संग्रह। द्वितीय चरणः सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक उपयोग के आधार पर पानी की खपत का रिकॉर्ड।

तृतीय चरणः शेष जल भंडार और भूजल पुनर्भरण (रिचार्ज) की क्षमता का आकलन। इस पासबुक में बारिश का रिकॉर्ड, बांधों-कुओं की स्थिति, वाटर रिचार्जिंग कार्य और खेती के लिए उपयोग होने वाले पानी का पूरा विवरण शामिल होगा।

खेती और अर्थव्यवस्था के लिए वरदान

नासिक जिला प्याज, अंगूर और सब्जियों की खेती के लिए जाना जाता है, जहाँ जल संसाधनों का अत्यधिक उपयोग होता है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पानी का जिम्मेदारी पूर्वक उपयोग करना आसान हो जाएगा। इससे न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों को फसलों के चयन और नियोजन में भी सटीक मदद मिलेगी। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में, यह 'पानी का सातबारा' मुहिम जल संकट से उबरने का सबसे प्रभावी माध्यम सिद्ध हो सकती है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com