

Maharashtra Private Company Closures: महाराष्ट्र को देश का औद्योगिक इंजन बताए जाने के दावों के बीच केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पिछले पांच वित्तीय वर्षों में महाराष्ट्र की करीब 36,211 निजी कंपनियां लिक्विडेट, विसर्जित या कंपनी रजिस्टर से स्ट्राइक ऑफ हुई हैं।
नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे द्वारा लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर से यह चौंका देने वाली जानकारी सामने आई है। औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिलों की बात करें तो नासिक में 840 कंपनियां बंद हुई, जबकि पुणे में 6,433, ठाणे में 4,704, मुंबई शहर में 12,009 और नागपुर में 1,478 कंपनियों पर ताला लग गया। इसके अलावा रायगढ़ में 822 और संभाजीनगर में 654 कंपनियां बंद होने की पुष्टि केंद्र सरकार ने की है।
कंपनियां बंद होने के साथ-साथ सांसद राजाभाऊ वाजे ने विस्थापित श्रमिकों के पुनर्वास और उनके बकाए का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने सवाल किया कि क्या कंपनियों के बंद होने के बाद श्रमिकों को उनके कानूनी देय (भविष्य निधि, ग्रेच्युटी और बकाया वेतन) मिले या नहीं, और क्या प्रभावितों के लिए कोई विशेष पुनर्वास योजना है? इस पर केंद्र सरकार के कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि निजी कंपनियों के बंद होने से प्रभावित हुए श्रमिकों का एकीकृत डेटा मंत्रालय द्वारा नहीं रखा जाता।
पिछले 5 वर्षों में 36 हजार से अधिक निजी कंपनियों का बंद होना अत्यंत गंभीर बात है। अकेले नासिक में 840 कंपनियां बंद हुई है।
सरकार को केवल नए उद्योगों की घोषणाएं करने के बजाय मौजूदा उद्योगों को बचाने, रोजगार की रक्षा करने और बंद पड़ चुकी कंपनियों के मजदूरों के अधिकारों को सुरक्षित करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
कंपनी के दिवालिया या परिसमापन प्रक्रिया में जाने पर श्रमिकों के दावों का निपटारा संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाता है।
हालाकि, इन 36,211 कंपनियों के बंद होने से कुल कितने मजदूर प्रभावित हुए, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा सरकार के पास उपलब्ध नहीं है।
सांसद वाजे ने सरकार का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि पिछले पांच वर्षों में राज्य में कितने नए उद्योग आए, कितना निवेश हुआ और कितने रोजगार पैदा हुए।
संसद में दिए गए जवाच में बंद हुई कंपनियों के मुकाबले नए उद्योगों का कोई स्पष्ट तुलनात्मक चित्र सामने नहीं आ सका।
इसके बाद से यह मांग जोर पकड़ रही है कि सरकार नए उद्योगों के आगमन के साथ-साथ बंद हो रहे या राज्य से बाहर जा रहे उद्योगों का हिसाब भी जनता के सामने रखे।