

Maharashtra Onion Farmers Protest: प्याज़ के बाजार भाव को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा निर्यात प्रतिबंध, निर्यात शुल्क या अन्य किसी प्रकार की पाबंदी नहीं लगाई जाए, इस प्रमुख मांग को लेकर प्याज़ उत्पादक किसान आक्रामक हो गए हैं। शनिवार को लासलगांव कृषि उपज बाजार समिति में आयोजित भव्य प्याज़ परिषद में स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के जिलाध्यक्ष निवृत्ति गारे ने किसानों की विभिन्न मांगों से संबंधित आठ प्रस्ताव रखे। किसानों ने हाथ उठाकर सर्वसम्मति से सभी प्रस्तावों को मंजूरी दी।
परिषद में प्याज़ विशेषज्ञ एवं मुंबई कृषि उपज बाजार समिति के संचालक जयदत्त होळकर, पूर्व जिलाध्यक्ष अर्जुन बोराडे, लासलगांव बाजार समिति के उपसभापति ललित दरेकर, व्यापारी संचालक प्रवीण कदम, जय किसान फोरम के जिलाध्यक्ष निवृत्ति न्याहारकर, महाराष्ट्र राज्य प्याज़ उत्पादक किसान संगठन के जिलाध्यक्ष केदारनाथ नवले, स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के जिलाध्यक्ष निवृत्ति गारे सहित बड़ी संख्या में किसान प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
किसानों की प्रमुख मांग है कि प्याज़ के लिए 2000 रुपये प्रति क्विंटल का भाव सुनिश्चित करने वाली भावांतर योजना लागू की जाए। साथ ही नाफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से होने वाली प्याज़ खरीद स्थायी रूप से बंद की जाए। सरकार द्वारा खरीदे गए प्याज़ को विदेशों में बेचने के बजाय घरेलू बाजार में उचित नियोजन के साथ बेचा जाए। किसानों ने प्याज़ निर्यात नीति एक समान रखने, निर्यात को स्थायी रूप से खुला रखने और प्याज़ आयात नहीं करने की मांग भी की। परिषद में बाजार समिति की नीलामी में प्याज़ का भाव प्रति क्विंटल के बजाय प्रति किलो घोषित करने, व्यापारियों पर स्टॉक लिमिट नहीं लगाने तथा प्याज़ निर्यात के लिए पहले की तरह 10 प्रतिशत सब्सिडी देने के प्रस्ताव भी मंजूर किए गए।
किसानों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की आयात-निर्यात नीति में बार-बार बदलाव से प्याज़ के बाजार भाव प्रभावित होते हैं। नाफेड-एनसीसीएफ की खरीद व्यवस्था को लेकर भी किसानों ने तीव्र नाराजगी जताई। किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार को देश में प्याज़ उत्पादन, घरेलू मांग और अतिरिक्त उत्पादन के निर्यात के लिए दीर्घकालीन नीति बनानी चाहिए।
जयदत्त होलकर ने कहा कि वर्ष 2017 में भी प्याज़ के बाजार भाव को लेकर गंभीर स्थिति बनी थी और तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर समस्या से अवगत कराया गया था। उन्होंने कहा कि केवल समितियां गठित करने से किसानों की समस्या का समाधान नहीं होगा। निवृत्ति न्याहारकर ने कहा कि नीति में लगातार बदलाव के कारण बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे प्रमुख निर्यात बाजारों में भारत की स्थिति कमजोर हुई है। वहीं केदारनाथ नवले ने नाफेड-एनसीसीएफ की प्याज़ खरीद को किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे बंद करने की मांग की। किसानों ने चेतावनी दी कि मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं लिया गया तो जनप्रतिनिधियों को गांवों में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी गई।