प्याज ने फिर रुलाए किसान! दाम धराशायी… सत्ता और विपक्ष पर बरसे भारत दिघोले

Nashik News: प्याज की गिरती कीमतों से महाराष्ट्र के किसान बुरी तरह आहत हैं। भारत दिघोले ने सत्ता और विपक्ष दोनों पर निशाना साधते हुए कहा कि नेताओं के लिए किसान अब सिर्फ वोट का साधन बनकर रह गए हैं।
प्याज की कीमतों में गिरावट (pic credit; social media)
प्याज की कीमतों में गिरावट (pic credit; social media)
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Falling Onion  Prices Maharashtra: प्याज की कीमतों में भारी गिरावट ने महाराष्ट्र के किसानों की कमर तोड़ दी है। राज्यभर की बाजार समितियों में प्याज के भाव दिन-प्रतिदिन नीचे जा रहे हैं और किसानों को लागत तक निकालना मुश्किल हो गया है। नाशिक समेत अन्य हिस्सों के प्याज उत्पादक किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और अब उनकी नाराज़गी सत्ताधारी दल और विपक्ष दोनों पर खुलकर सामने आ गई है।

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संगठन के संस्थापक अध्यक्ष भारत दिघोले ने किसानों की व्यथा को जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत और पसीने की कोई कीमत नहीं रह गई है। सत्ता पक्ष दिल्ली जाकर केंद्र से ठोस निर्णय लेने की बजाय चुप्पी साधे बैठा है और विपक्ष केवल राजनीति चमकाने में व्यस्त है।

भारत दिघोले ने शरद पवार को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और दस वर्षों तक केंद्रीय कृषि मंत्री रहने वाले शरद पवार दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री से बात कर सकते थे। लेकिन ऐसा करने के बजाय उन्होंने केवल नाशिक में मोर्चा और रास्ता रोको आंदोलन कर किसानों की भावनाओं का इस्तेमाल किया। इससे विपक्ष को राजनीतिक फायदा मिला, लेकिन किसानों की जेब खाली ही रही।

उन्होंने दिसंबर 2023 की याद दिलाई जब केंद्र सरकार ने प्याज पर निर्यातबंदी लगा दी थी। उस वक्त भी किसानों को भारी नुकसान हुआ, लेकिन शरद पवार ने दिल्ली जाकर इस निर्णय को हटवाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने चांदवड़ में रास्ता रोको आंदोलन किया और किसानों की उम्मीदों को तोड़ दिया।

आज भी वही स्थिति है। किसान अपने खेतों और मंडियों में नुकसान झेल रहे हैं। सत्ताधारी दल अपने अहंकार में किसानों की सुध नहीं ले रहे और विपक्ष केवल चुनावी फायदा उठाने में जुटा है। भारत दिघोले ने कहा कि किसानों के सवाल आज वोट पाने का साधन बन गए हैं। कोई भी दल उनकी असली समस्या को सुलझाने की कोशिश नहीं कर रहा है।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्याज के दामों पर जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो किसानों का आक्रोश और भी उग्र रूप ले सकता है। नाशिक के कई इलाकों में पहले ही किसान आंदोलन की तैयारी कर चुके हैं। किसानों की बदहाली अब पूरे महाराष्ट्र में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन चुकी है।

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