गोकुल गिते समर्थन देंगे या मैदान में ही बने रहेंगे? नासिक विधान परिषद चुनाव में राजनीतिक संशय बरकरार

Nashik Politics: नासिक स्थानीय प्राधिकरण विधान परिषद चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार गोकुल गिते की भूमिका को लेकर राजनीतिक संशय बना हुआ है। नाम वापसी की चर्चाओं के बावजूद गिते प्रचार में सक्रिय है।
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Gokul Gite (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
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Nashik MLC Election: नासिक स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार गोकुल गिते की भूमिका को लेकर राजनीतिक संशय लगातार गहराता जा रहा है। मंत्री गिरीश महाजन ने संकेत दिए थे कि गिते चुनाव से अपना नाम वापस ले सकते हैं, लेकिन अब तक उन्होंने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है। इसके विपरीत, वे लगातार प्रचार अभियान में सक्रिय हैं और मतदाताओं से संपर्क बढ़ा रहे हैं। इससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि गिते आखिर तक चुनाव मैदान में बने रहेंगे या कोई नया निर्णय लेंगे।

सोमवार को निर्दलीय उम्मीदवार प्रसाद हिरे ने अपनी उम्मीदवारी वापस लेकर शिवसेना उम्मीदवार नरेंद्र दराडे को सार्वजनिक समर्थन दे दिया। इसके बाद चुनावी समीकरणों में बदलाव की चर्चा शुरू हो गई। इसी पृष्ठभूमि में देर रात मंत्री गिरीश महाजन ने हवाई अड्डे पर गोकुल गिते से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि इस दौरान गिते की उम्मीदवारी वापस लेने के मुद्दे पर चर्चा हुई, लेकिन कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया। इससे महायुति की रणनीति को लेकर विभिन्न तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

गोकुल गिते की भूमिका पर सस्पेंस

इस बीच मंगलवार को गोकुल गिते ने सटाणा तालुका में अपना प्रचार अभियान जारी रखा। उन्होंने नगरसेवकों, पदाधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर समर्थन जुटाने का प्रयास किया। गिते की सक्रियता को देखते हुए ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वे फिलहाल चुनाव से पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। इससे चुनावी मुकाबले के त्रिकोणीय होने की संभावना और मजबूत हो गई है।

दूसरी ओर, शिवसेना उम्मीदवार नरेंद्र दराडे के प्रचार अभियान ने भी गति पकड़ ली है। उनके भाई और विधायक किशोर दराडे विभिन्न स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के सदस्यों से संपर्क साध रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने पूर्व स्थायी समिति सभापति गणेश गिते के निवास पर भी भेंट की। गणेश गिते की पत्नी नगरसेविका होने के कारण मतदान के मद्देनजर यह मुलाकात की गई, ऐसा उन्होंने स्पष्ट किया। हालांकि, इस मुलाकात के बाद राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और गिते परिवार की भूमिका को लेकर भी उत्सुकता बढ़ गई है।

नाम वापसी की अटकलों के बीच गोकुल गिते का प्रचार तेज

विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन वापस लेने की अवधि अब समाप्त हो चुकी है। ऐसे में चुनाव मैदान में तीन उम्मीदवार बने हुए हैं। इनमें से एक उम्मीदवार ने समर्थन की घोषणा कर दी है, लेकिन गोकुल गिते अब भी मैदान में डटे हुए हैं। ऐसे में मतों के बंटवारे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के नगरसेवक मतदाताओं के मतदान पर ही इस चुनाव का परिणाम काफी हद तक निर्भर रहने वाला है।

अब पूरे जिले की नजर इस बात पर टिकी है कि गोकुल गिते आखिर तक चुनाव लड़ेंगे या मतदान से पहले कोई नया राजनीतिक समीकरण सामने आएगा। फिलहाल उनकी भूमिका ने चुनाव को बेहद रोचक बना दिया है और मुकाबला काफी कांटे का होने के संकेत मिल रहे हैं।

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