Nashik News: ढोल-ताशों की गूंज में विदा हुए गणराया, 15 घंटे चला गणपति विसर्जन जुलूस
Ganpati Visarjan: लगातार बारिश के बावजूद नाशिक में 15 घंटे चला गणपति विसर्जन जुलूस। ढोल-ताशों की धुन पर गणेश भक्त झूमे और मनपा आयुक्त मनीषा खत्री ने भी ध्वज लहराया।
- Written By: अर्पित शुक्ला
ढोल-ताशों की गूंज में विदा हुए गणराया
Nashik News: गणपती बाप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या की सदा के साथ, गणेश भक्तों ने लगातार हो रही बारिश के बीच भी अपने प्रिय गणराया को विदा किया। मुख्य विसर्जन जुलूस लगभग 15 घंटे से अधिक समय तक चला, जिसमें 25 सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल शामिल हुए। इन मंडलों ने ढोल-ताशा समूहों, बेंजो पार्टियों और सटाणा ढोल की मदद से जुलूस निकाला। वहीं, छह मंडलों ने ‘साउंड वॉल’ और ढोल-ताशा समूह दोनों का इस्तेमाल किया।
नाशिक मनपा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल के पहले गणपति की आरती के साथ जुलूस की शुरुआत हुई। इस दौरान, मनपा आयुक्त और प्रशासक मनीषा खत्री भी उत्साह के साथ इसमें शामिल हुईं।
पारंपरिक वाद्ययंत्रों का बढ़ता क्रेज
पिछले कुछ वर्षों में, अधिकांश लोगों का रुझान पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ जुलूस निकालने की ओर बढ़ा है। यही कारण है कि शहर में ढोल समूहों की संख्या हर साल बढ़ रही है, और वर्तमान में इनकी संख्या 40 के आसपास होने का अनुमान है। ढोल वादन ने युवाओं को बड़े पैमाने पर आकर्षित किया है। समूहों का कहना है कि ढोल वादकों में केवल कॉलेज के छात्र ही नहीं, बल्कि नौकरीपेशा और व्यवसायी भी शामिल हैं।
सम्बंधित ख़बरें
स्कूल गई लेकिन घर नहीं लौटी; सिंधुदुर्ग में कोल्हापुर की शिक्षिका लापता, मासूम बेटा कर रहा मां का इंतजार
पालघर में ढोंगी बाबा की घिनौनी करतूत; इलाज के नाम पर 13 वर्षीय किशोरी से बलात्कार, आरोपी गिरफ्तार
Pune Nasrapur Case Protest: नसरापुर कांड पर पुणे में उबाल, दोषी को फांसी की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन
आलंदी में 15 करोड़ की निधि पर शिवसेना में ‘क्रेडिट वॉर’, गुटबाजी खुलकर सामने
खास बात यह है कि कुछ सदस्य नौकरी के लिए बाहरगांव रहते हैं, और वे सिर्फ विसर्जन जुलूस में भाग लेने के लिए विशेष रूप से मुंबई और पुणे से नाशिक आते हैं। एक ढोल समूह में कम से कम 50 ढोल और 20 से 25 ताशे होते हैं। ढोल की ताल पर ध्वज लहराने वालों को ध्वजधारी कहा जाता है। हर ढोल समूह में एक प्रमुख ध्वज होता है, जिसकी ऊंचाई अन्य छोटे ध्वजों से अधिक होती है, और जुलूस में इसका विशेष ध्यान रखा जाता है। समूह में ध्वजधारी, ढोल वादक, हलगी, संबल और अन्य वाद्ययंत्र बजाने वाले शामिल होते हैं।
आयुक्त का उत्साह
मनपा आयुक्त मनीषा खत्री भी विसर्जन जुलूस में पारंपरिक वाद्ययंत्रों से काफी प्रभावित हुईं। उन्होंने मनपा मंडल के पहले गणपति के जुलूस में भाग लिया। जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने नारियल फोड़कर और गणराया की आरती करके विसर्जन जुलूस की शुरुआत की। इस मंडल में ढोल-ताशा समूह भी शामिल था। आयुक्त खत्री ने ध्वजधारी बनकर खुद ढोल की ताल पर भगवा ध्वज लहराया।
यह बी पढ़ें- बारिश के बीच भी दिखा भक्तों में उत्साह, गणेश विसर्जन जुलूस में दिखा मंत्री गिरीश महाजन का अलग अंदाज
इसके बाद, उन्होंने कुछ समय के लिए ढोल बजाने का भी आनंद लिया। खुद आयुक्त को ढोल बजाते देख, अधिकारी और कर्मचारियों का उत्साह भी बढ़ गया। इस दौरान मनपा के अतिरिक्त आयुक्त प्रदीप चौधरी, शहर अभियंता संजय अग्रवाल सहित विभाग प्रमुख और कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद थे।
