Nashik fuel crisis: ‘स्टॉक भरपूर’ के दावों के बीच पेट्रोल पंप ड्राय, घंटों कतारों में खड़े लोग

Nashik fuel crisis: नासिक में पेट्रोल-डीजल की किल्लत से प्रशासन के दावों पर सवाल उठ रहे हैं। तेल कंपनियों ने पर्याप्त स्टॉक की बात कही, जबकि पंप संचालकों ने सप्लाई में देरी का आरोप लगाया।
Nashik faces a severe fuel crisis amid conflicting claims by oil firms and pump owners. Authorities blame panic buying, while operators cite delayed tanker supply.
ईंधन संकट (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Nashik Petrol diesel shortage crisis: ऑयल कंपनियां दावा कर रही हैं कि ईंधन का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि उन्हें रोज टैंकर नहीं मिल रहे, जबकि प्रशासन आपूर्ति सुचारु होने का दावा कर रहा है। इन परस्पर विरोधी दावों के कारण नासिक जिले में ईंधन संकट का रहस्य और गहरा गया है।

बुलाई गई आपात बैठक

पिछले कुछ दिनों से शहर सहित जिलेभर में पेट्रोल और डीजल के लिए वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। ऐसे में नागरिक अब सवाल उठा रहे हैं कि यदि स्टॉक भरपूर है, तो आखिर किल्लत पैदा कैसे हुई? इसी बढ़ते भ्रम और नाराजगी के बीच जिला आपूर्ति अधिकारी रमेश गायकवाड़ ने शुक्रवार को ऑयल कंपनियों के प्रतिनिधियों और पेट्रोल पंप संचालकों की आपात बैठक बुलाई। बैठक में ईंधन आपूर्ति सुचारु रखने के स्पष्ट निर्देश दिए गए, साथ ही ऑयल कंपनियों के अधिकारियों ने पेट्रोल पंप संचालकों को प्रतिदिन नियमित टैंकर आपूर्ति का आश्वासन दिया। बैठक के बाद दावा किया गया कि अगले एक-दो दिनों में हालात सामान्य हो जाएंगे।

कई पेट्रोल पंपों पर 'नो पेट्रोल' के लगे बोर्ड

हालांकि जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। नासिक जिले के कई पेट्रोल पंपों पर 'नौ पेट्रोल' और 'डीजल खत्म' जैसे बोर्ड लगे दिखाई दिए। कई जगह वाहन चालकों की देर रात तक कतारों में खड़ा रहना पड़ा, जबकि अनेक लोग बिना ईंधन लिए वापस लौटे। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और गंभीर बताई जा रही है। किसान, ट्रांसपोर्टर और व्यापारियों को इसका बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है और ईंधन की कमी से कई कामकाज प्रभावित हुए हैं।

पेट्रोल पंप संचालकों की क्या हैं शिकायतें?

ऑयल कंपनी में ऑर्डर और आरटीजीएस करने के बाद भी तीन-तीन दिन तक टैंकर नहीं पहुंचते। इससे पेट्रोल पंप ड्राय हो जाते है। रोज टैंकर उपलब्ध कराया जाए या ऑर्डर देने के तुरंत बाद टैंकर भेजा जाए, तो किल्लत महसूस नहीं होगी। अधिकारी फोन नहीं उठाते, जिससे भ्रम की स्थिति बनती है। पेट्रोल पंप संचालकों की ऐसी कई शिकायते हैं। उन्होंने बैठक में यह सवाल भी उठाया कि जब कोई कमी नहीं है, तो फिर आपूर्ति क्यों रोकी जा रही है।

लोग जरूरत से ज्यादा खरीद रहे ईंधन

बैठक में अधिकारियों ने पैनिक बायिंग को संकट का मुख्य कारण बताया। उनके अनुसार ईंधन किल्लत की अफवाह फैलने के बाद लोगों ने जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल खरीदना शुरू कर दिया। इससे अचानक मांग बढ़ी और सामान्य दिनों की तुलना में बिक्री अधिक होने से सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया। हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या केवल अफवाहों के कारण इतनी बड़ी किल्लत पैदा हो सकती है? पेट्रोल पंप संचालकों ने भी बैठक में अपनी समस्याएं रखी।

सूत्रों के मुताबिक कुछ पंप संचालकों ने सवाल उठाया कि ग्राहकों का गुस्सा हमें झेलना पड़ता है, लेकिन समय पर टैंकर ही नहीं मिलेंगे तो बिक्री कैसे करें? कई जगह टैंकरों की देरी से आपूर्ति, वितरण में असंतुलन और अचानक बढ़ी मांग के कारण हालात बिगड़ने की बात भी सामने आई।

घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर लोग

  • सबसे अहम बात यह है कि प्रशासन, ऑयल कंपनियों और पेट्रोल पंप संचालकों के बीच समन्वय की कमी साफ दिखाई दे रही है। एक ओर पर्याप्त स्टॉक होने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नागरिकों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। इससे प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
  • इस बैठक में जिला आपूर्ति अधिकारी रमेश गायकवाड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम के सेल्स मैनेजर प्रथमेश सोनवणे, भारत पेट्रोलियम के आकाश गुंडे, इंडियन ऑइल के प्रतिनिधि तथा पेट्रोल पंप एसोसिएशन के पदाधिकारी उपस्थित थे। प्रशासन ने नागरिकों से घबराकर अतिरिक्त ईंधन खरीदने से बचने की अपील की है, लेकिन जब तक जमीनी स्तर पर आपूर्ति पूरी तरह सामान्य नहीं होती, तब तक लोगों की चिंता कम हो नहीं दिख रही है।
  • ग्राहकों में घबराहट के कारण बिक्री बढ़ी है। ईंधन की कोई कमी नहीं है। केवल मांग बढ़ने के कारण कभी-कभी पेट्रोल पंप ड्राय हो जाते हैं। लेकिन एक-दो दिनों में स्थिति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी। लासलगांव का मुद्दा भी सुलझा लिया गया है और वहां भी नियमित आपूर्ति शुरू होगी। जिला आपूर्ति अधिकारी की बैठक में आपूर्ति सुचारु रखने पर जोर दिया गया है।-प्रथमेश सोनवणे, सेल्स मैनेजर, एचपीसीएल
  • ऑयल कंपनी के प्रतिनिधियों और 66 इस बैठक में आपूर्ति को सुचारू रूप से कैसे किया जाए, इस पर चर्चा हुई। आपूर्ति व्यवस्था सुचारू रखने के निर्देश दिए गए है। - रमेश गायकवाड़, जिला आपूर्ति अधिकारी
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