

6 नवंबर को धनतेरस के साथ पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत।
8 नवंबर को नरक चतुर्दशी और महालक्ष्मी पूजन एक ही दिन।
अभ्यंग स्नान का शुभ समय सुबह 5:41 से 6:38 बजे तक।
लक्ष्मी-गणेश पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त शाम 5:54 से 7:50 बजे तक।
10 नवंबर को मनाई जाएगी गोवर्धन पूजा और अन्नकूट।
Nashik Diwali Festival Dates Puja Muhurat 2026: इस वर्ष पांच दिवसीय दीपोत्सव 6 नवंबर से धनतेरस के साथ शुरू होगा। पंचांग के अनुसार 8 नवंबर को नरक चतुर्दशी और महालक्ष्मी पूजन एक ही दिन मनाए जाएंगे, जबकि गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को होगी। लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 5:54 से 7:50 बजे तक रहेगा।
नासिक शहर, प्रकाश का पर्व दीपावली इस वर्ष तिथियों के विशेष संयोग के कारण कुछ बदलावों के साथ मनाया जाएगा। आमतौर पर अलग-अलग दिनों में मनाए जाने वाले नरक चतुर्दशी और महालक्ष्मी पूजन इस बार एक ही दिन पड़ रहे हैं। पंचांग की गणना के अनुसार, पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत 6 नवंबर को धनतेरस से होगी और 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा के साथ इसका प्रमुख क्रम पूरा होगा।
दीपोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार, 6 नवंबर को धनतेरस के साथ होगा। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा का विधान है। मान्यता है कि धनतेरस पर खरीदारी और पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे समाप्त होगी। इस दिन लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार बर्तन, आभूषण और अन्य उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी करेंगे। प्रदोष काल में दीपदान और पूजा का भी विशेष महत्व है।
इस वर्ष तिथियों के विशेष संयोग के कारण नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली और मुख्य दीपावली एक ही दिन, रविवार 8 नवंबर को मनाई जाएगी। 7 नवंबर को काली चौदस का योग रहेगा, लेकिन उदया तिथि और चतुर्दशी के प्रामाणिक काल की गणना के अनुसार नरक चतुर्दशी का मुख्य अनुष्ठान 8 नवंबर को होगा।
नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व है। इसका शुभ समय सुबह 5:41 से 6:38 बजे तक रहेगा।
कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। 8 नवंबर को प्रदोष काल प्राप्त होने के कारण इसी दिन महालक्ष्मी पूजन किया जाएगा।
लक्ष्मी-गणेश पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त शाम 5:54 से 7:50 बजे तक रहेगा। वहीं प्रदोष काल शाम 5:31 से रात 8:09 बजे तक है। इस दौरान घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों में दीप जलाकर माता लक्ष्मी की पूजा की जाएगी।
आमतौर पर दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट मनाया जाता है, लेकिन इस बार तिथियों के फेरबदल के कारण यह पर्व 10 नवंबर को मनाया जाएगा। 9 नवंबर की सुबह तक अमावस्या तिथि का प्रभाव रहेगा। प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे शुरू होकर 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे तक रहेगी। उदया तिथि और पंचांग गणना के अनुसार मंगलवार, 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा की जाएगी।
इस तरह इस वर्ष दीपोत्सव के दौरान छोटी दिवाली और लक्ष्मी पूजन एक ही दिन होने से तारीखों को लेकर भ्रम की स्थिति बन सकती है। पंचांग के अनुसार प्रमुख पूजा-अनुष्ठानों की तारीख और मुहूर्त का ध्यान रखकर श्रद्धालु त्योहार मना सकेंगे।