

Nashik Diwakar Wada Kapaleshwar Mahadev Temple: श्री कपालेश्वर महादेव मंदिर के समीप स्थित चर्चित ‘दिवाकर वाडा’ की खरीद-बिक्री को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस मामले में जमीन के पूर्व मालिक श्रीकृष्ण वासुदेव बिवलकर ने मंदिर के पुजारी हेमंत उर्फ पप्पू गाडे द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि संपत्ति का सौदा पूरी तरह कानूनी, पारदर्शी और सभी नियमों के अनुरूप किया गया था।
बिवलकर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जिस जमीन को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, वह उनके परिवार की पुश्तैनी और निजी संपत्ति थी। उन्होंने कहा कि संपत्ति पर उनका वैध मालिकाना हक था और कानून के अनुसार उसे बेचने का पूरा अधिकार भी उनके पास था। ऐसे में इस सौदे को लेकर लगाए जा रहे आरोप तथ्यहीन और भ्रामक हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुजारी हेमंत गाडे का वास्तविक उद्देश्य इस संपत्ति पर स्वयं नियंत्रण हासिल करना था। बिवलकर के अनुसार, जब उनकी यह कोशिश सफल नहीं हो सकी और जमीन का सौदा देवस्थान ट्रस्ट के साथ संपन्न हो गया, तब उन्होंने मामले को विवादित बनाने के लिए भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाने शुरू कर दिए। उन्होंने कहा कि सौदे से संबंधित सभी दस्तावेज, अनुमति और कानूनी प्रक्रियाएं विधिवत पूरी की गई थीं।
विवाद का केंद्र बनी यह संपत्ति सिटी सर्वे नंबर 56 और 70 में स्थित है। इस जमीन की खरीद देवस्थान ट्रस्ट द्वारा की गई है। ट्रस्ट का कहना है कि भविष्य में यहां मंदिर में आने वाले नासिक श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ‘भक्त निवास’ विकसित किया जाएगा, जिससे दूर-दराज से आने वाले भक्तों को ठहरने की बेहतर व्यवस्था मिल सकेगी।
बिवलकर ने यह भी कहा कि सार्वजनिक हित से जुड़ी इस परियोजना को अनावश्यक विवादों में घसीटना उचित नहीं है। उन्होंने संबंधित पक्षों से तथ्य और दस्तावेजों के आधार पर चर्चा करने की अपील की तथा कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो वे अपने दावों के समर्थन में सभी कानूनी दस्तावेज सार्वजनिक करने को भी तैयार हैं।
इस बीच, मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर जारी है। देवस्थान ट्रस्ट ने भी दोहराया है कि जमीन की खरीद का उद्देश्य केवल श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विस्तार करना है और पूरे प्रकरण में किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता नहीं हुई है। अब सभी की निगाहें इस विवाद के अगले घटनाक्रम और संबंधित पक्षों की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।