देवस्थान इनाम उन्मूलन कानून का मसौदा स्थगित; नासिक में मनसे और हिंदुत्ववादी संगठनों के आंदोलन का बड़ा असर
Nashik Temple News: महाराष्ट्र सरकार ने विवादित 'देवस्थान इनाम उन्मूलन प्रारूप अधिनियम 2026' को स्थगित किया। नासिक में मनसे और हिंदुत्ववादी संगठनों ने इसके खिलाफ उग्र आंदोलन किया था।
- Written By: रूपम सिंह
देवस्थान इनाम उन्मूलन (फोटो- सोशल मीडिया)
Nashik Devasthan Inam Abolition Act 2026: महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘देवस्थान इनाम उन्मूलन प्रारूप अधिनियम 2026’ के खिलाफ नासिक से उठी आवाज का बड़ा असर हुआ है। भारी विरोध और तीव्र जनाक्रोश को देखते हुए राज्य सरकार ने इस विवादास्पद कानून के मसौदे को फिलहाल स्थगित कर दिया है। नासिक में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और विभिन्न हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा छेड़े गए आंदोलन ने इस मुद्दे को पूरे राज्य में चर्चा का केंद्र बना दिया था।
नासिक से तेज हुआ था विरोध का स्वर
नासिक शहर और जिले में इस प्रस्तावित कानून को लेकर गहरा आक्रोश था। मनसे के शहर उपाध्यक्ष एडवोकेट नितिन पंडित ने न केवल इसका कड़ा विरोध किया, बल्कि आधिकारिक रूप से कड़ा विरोध हुआ था। अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराईं।
नासिक शहर के प्रमुख मंदिर प्रशासनों और दक्षिणपंथी संगठनों ने एक सुर में सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे। आंदोलनकारियों का साफ कहना था कि नासिक जैसे धार्मिक नगरी में स्थित मंदिरों की हजारों एकड़ जमीन का भविष्य इस कानून से दांव पर लगा था। क्यों निशाने पर था यह कानून?
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मंदिरों की जमीनों पर मंडराता संकट टला
नासिक के आंदोलकों द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे मंदिर प्रशासनों का तर्क था कि देवस्थानों के पास मौजूद जमीनें पीढ़ियों से धार्मिक कार्यों और सेवा के लिए समर्पित हैं। उन्हें काश्तकारों को सौंपना मंदिरों के वैध अधिकारों का हनन है।
नासिक में प्रदर्शन के दौरान सरकार से यह तीखा सवाल पूछा गया कि वक्फ और चर्च की संपत्तियों को अछूता छोड़कर केवल हिंदू मंदिरों की जमीनों को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है? कानून के मसौदे में अवैध अतिक्रमणों को नियमित करने का प्रावधान था, जिसका स्थानीय स्तर पर कड़ा विरोध हुआ था।
