चोरला घाट मामला: 400 करोड़ की लूट, नाशिक पुलिस ने ‘मास्टरमाइंड’ को दबोचा

400 Crore Fraud Case: चोरला घाट में 400 करोड़ रुपये के कंटेनर लूट मामले में नाशिक पुलिस ने कथित मास्टरमाइंड को हिरासत में लिया, जबकि एफआईआर में देरी को लेकर जांच पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
Chorla Ghat robbery
400 CroreFraud Case (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Chorla Ghat Robbery: कर्नाटक के चोरला घाट में हुए 400 करोड़ रुपये के कंटेनर लूट मामले में हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं। नाशिक ग्रामीण पुलिस ने इस सनसनीखेज प्रकरण के मुख्य संदिग्ध किशोर सावला के मैनेजर और कथित मास्टरमाइंड विराट गांधी को हिरासत में लिया है।

इस बीच कर्नाटक के बेलगाम जिले (खानापुर थाना) से पुलिस अधिकारी मामले की जानकारी लेने नाशिक पहुंचे, लेकिन जांच की वास्तविक स्थिति से उनकी अनभिज्ञता ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा अनुत्तरित प्रश्न यह बना हुआ है कि कंटेनर में मौजूद कथित 400 करोड़ रुपये आखिर किसके थे। आरोप लग रहे हैं कि मूल मुद्दे को दरकिनार कर जांच को भटकाने की कोशिश की जा रही है।

कर्नाटक पुलिस नासिक पहुंची

शिकायतकर्ता संदीप पाटिल ने 17 दिसंबर को नाशिक ग्रामीण पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर लिखित शिकायत दी थी। इसके बाद 19 दिसंबर को बयान दर्ज किए गए, जिसमें आरोपी जयेश कदम ने स्वीकार किया कि घटना हुई है और लूटी गई रकम 400 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। इसके बावजूद 22 दिनों तक प्राथमिकी दर्ज न होना अब चर्चा और विवाद का विषय बन गया है। इन 22 दिनों में स्थानीय अपराध शाखा ने क्या जांच की, किन-किन लोगों के कॉल रिकॉर्ड खंगाले गए और घोटी पुलिस स्टेशन को जांच रिपोर्ट भेजने में देरी क्यों हुई। इसकी आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है।

जांच में देरी पर उठे गंभीर सवाल

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नवंबर 2013 के ललिता कुमारी बनाम राज्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत किसी भी शिकायत पर प्राथमिक जांच कर अधिकतम सात दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। ऐसे में 400 करोड़ रुपये जैसे गंभीर मामले को 22 दिनों तक लंबित रखना सीधे तौर पर न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की ओर संकेत करता है।

नासिक ग्रामीण पुलिस का पत्र मिलने के बाद बेलगाम पुलिस बस से नाशिक पहुंची। मामले को लेकर उनकी सीमित जानकारी देख उपस्थित लोगों को अभिनेता आमिर खान की फिल्म पीके की याद आ गई। कर्नाटक पुलिस अब शिकायतकर्ता के साथ घोटी जाकर दस्तावेज एकत्र करेगी और आगे की जांच के लिए वापस लौटेगी।

एसआईटी गठित

शिकायतकर्ता संदीप पाटिल ने कहा कि “मेरे पास कोई ठोस सबूत न होने के बावजूद मुझ पर अन्याय हुआ। जान का खतरा होने के कारण मैं बार-बार पुलिस के चक्कर काटता रहा, लेकिन मामला 22 दिनों बाद दर्ज हुआ। इस दौरान संबंधित अधिकारी किनसे मिले और कहां गए, इसकी जांच होनी चाहिए। दुर्भाग्य से वही अधिकारी अब एसआईटी का हिस्सा हैं। मेरी मांग है कि एक सक्षम और निष्पक्ष एसआईटी गठित कर मामले की गहराई से जांच की जाए।”

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