ट्रांसफर नहीं, सीधे सस्पेंड! भोंदू बाबा खरात मामले में बावनकुले का बड़ा एक्शन, अधिकारियों के छूटे पसीने

Ashok Kharat Case: अशोक खरात प्रकरण में राजस्व मंत्री बावनकुले का बड़ा बयान- मददगार अफसरों का तबादला नहीं, सीधे बर्खास्तगी होगी। एसआईटी जांच और सीडीआर विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल।
Revenue Minister Chandrashekhar Bawankule warns of direct dismissal for officers supporting Ashok Kharat. SIT probes CDR links involving top leaders and PA Ramesh Hinge.
चंद्रशेखर बावनकुले और अशोक खरात (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Ashok Kharat Case Politics: राज्य में वर्तमान में नासिक के स्वयंभू बाबा अशोक खरात प्रकरण पर केंद्रित ध्यान है और अशोक के एक से बढ़कर एक कांड सामने आए हैं। इसी बीच, अशोक खरात के मोबाइल कॉल डिटेल्स (सीडीआर) भी निकाले गए हैं, जिनमें कई बड़े नेताओं और कुछ अधिकारियों के नाम शामिल होने की जानकारी मिली है।

इस पृष्ठभूमि में, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने संबंधित अधिकारियों को सीधे चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अशोक खरात को मदद करने वाले अधिकारियों का केवल तबादला नहीं होगा, बल्कि उन्हें बर्खास्त भी किया जाएगा, चाहे वे किसी भी विभाग में हों। खरात प्रकरण महाराष्ट्र की संस्कृति पर काला धब्बा लगाने वाली घटना है। इसलिए एसआईटी इस मामले में उचित कार्रवाई कर रही है।

जिनके पास सबूत हैं, उन्हें एसआईटी को प्रदान करने चाहिए। शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि हमारे अधिकारी किसी प्रकार की मदद में शामिल पाए गए, तो उन पर भी कार्रवाई होगी। एसआईटी टीम से नाम आने पर उन्हें नौकरी पर नहीं रखा जाएगा।

खरात के PA से पुलिस ने की पूछताछ

अशोक खरात का एक महत्वपूर्ण मोहरा पुलिस के हाथ लगा है। उनसे अशोक खरात के सभी काले कृत्यों की जानकारी मिलने की संभावना है। शिरडी पुलिस तीन घंटे तक रमेश हिंगे नामक व्यक्ति और उसके भाई की पूछताछ की है। रमेश हिंगे लंबे समय से अशोक खरात के साथ काम कर रहा था। जानकारी के अनुसार वह खरात का निजी सहायक था। इसलिए उसे अशोक खरात के कई रहस्य पता होने की संभावना है। रमेश हिंगे मिरगांव के निवासी हैं। इसी गांव में खरात का फार्महाउस और ईशान्यश्वर मंदिर है। लंबे समय से रमेश हिंगे अशोक खरात के निजी सहायक के रूप में काम कर रहा है। कई बड़े नेताओं और अधिकारियों के कार्यक्रमों में भी रमेश हिंगे दिखाई देता था। इसलिए हिंगे को कई बातें पता होने की संभावना है।

कोई भी बच नहीं पाएगा

अशोक खरात मामले में कोई भी बच नहीं पाएगा। एसआईटी जांच कर रही है और जिन अधिकारियों के नाम सामने आएंगे, उन्हें नौकरी से हटा दिया जाएगा। अशोक खरात के इलाके के सीसीटीवी कैमरे भी जांचे जाएंगे और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। जिन अधिकारियों ने अशोक खरात को जमीन और संपत्ति जमा करने में मदद की, उन पर भी कार्रवाई होगी।

मुख्यमंत्री कार्यालय ऐसी जानकारी नहीं देगा

अंजली दमानिया के पास सीडीआर कैसे आई, इस पर संजय राऊत के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह मामला बहुत संवेदनशील है, इसलिए मुख्यमंत्री कार्यालय ऐसी जानकारी नहीं देगा। दमानिया के पास जो जानकारी है, वह एसआईटी को दें। शिरडी प्रकरण में यदि मुझे सुनवाई करनी पड़ी तो मैं निर्णय लूंगा, और जो लोग अपराध में शामिल होंगे, उन पर कार्रवाई होगी।

खरात CDR में BJP नाम क्यों नहीं : सुषमा अंधारे

अशोक खरात प्रकरण को लेकर समाजसेविका अंजली दमानिया द्वारा मोबाइल फोन के सीडीआर रिकॉर्ड सार्वजनिक करना अच्छी बात है, लेकिन इससे कई गंभीर सवाल भी खड़े हुए है। उद्धव गुट की नेत्री सुषमा अंधारे ने पुणे में आयोजित पत्रकार परिषद में पूछा कि जब विपक्ष बार-बार मांग करने के बावजूद सीडीआर हासिल नहीं कर पाता, ती दमानिया को यह रिकॉर्ड किसने उपलब्ध कराया?

अंधारे ने कहा कि दमानिया के अनुसार तत्कालीन मुख्यमंत्री ने अशोक खरात को 17 कॉल किए थे, लेकिन इन कॉल्स का पूरा इनकमिंग-आउटगोइंग रिकॉर्ड, कॉल का समय और अवधि भी सामने आनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इन कॉल्स का संबंध एकनाथ शिंदे तक जाता है, तो फिर भाजपा के अन्य नेताओं के नाम सीडीआर सूची में क्यों नहीं है।

उन्होंने यह भी पूछा कि अशोक खरात के ईशान्येश्वर मंदिर को पर्यटन स्थल का दर्जा देने और मंदिर के लिए 1 करोड़ रुपये के सुशोभिकरण निधि को मंजूरी देने वालों का कोई कॉल रिकॉर्ड सामने क्यों नहीं आया। अंधारे ने आरोप लगाया कि दमानिया द्वारा जारी सीडीआर में भाजपा के किसी नेता का नाम न होना संदेह पैदा करता है और यह जांच होनी चाहिए कि भाजपा के किन नेताओं का खरात से संपर्क था। इस प्रकरण में जांच को इतने दिन बीत जाने के बावजूद एसआईटी से कोई जानकारी नहीं दी जा रही।

Navbharat Live
navbharatlive.com