

दस हजार रुपये के लोन के लिए किसान को उठाया गया।
निजी फाइनेंस कंपनी के दफ्तर में मिला लटकता हुआ शव।
परिजनों ने प्रताड़ित कर हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया।
Nanded Farmer Death Finance Company Murder Allegations: महाराष्ट्र के नांदेड जिले से एक अत्यंत खौफनाक और संतापजनक मामला सामने आया है। यहां महज 8 से 10 हजार रुपये के कर्ज की वसूली के लिए 40 वर्षीय छोटे किसान चंद्रकांत दगडूजी शिंदे की एक निजी फाइनेंस कंपनी के दफ्तर में संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत हो गई। किसान का शव फाइनेंस कंपनी के कार्यालय में फंदे से लटकता हुआ पाया गया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
मृतक के परिजनों ने गंभीर आरोप लगाया है कि फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों ने किसान को कार्यालय में बंद करके उनके साथ मारपीट व अमानवीय उत्पीड़न किया, उनकी हत्या कर दी और मामले को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को फांसी पर लटका दिया।
मीडिया रिपाेर्ट के अनुसार, मृतक चंद्रकांत दगडूजी शिंदे नांदेड जिले की मुदखेड़ तालुका के मालकौठा गांव के रहने वाले थे। उनके पास केवल दो एकड़ कृषि भूमि थी। अपनी घरेलू जरूरतों और खेती के लिए उन्होंने नांदेड शहर के हिंगोली गेट से चिखलवाडी बायपास रोड पर स्थित केएफ एंटरप्राइजेस नाम की एक निजी फाइनेंस कंपनी से 10,000 रुपये का कर्ज लिया था।
कर्ज की किश्तें बकाया होने के कारण, बुधवार के दिन फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी सीधे मालकौठा गांव पहुंचे और चंद्रकांत को अपने साथ नांदेड स्थित कंपनी के कार्यालय में ले आए। परिजनों का आरोप है कि उन्हें दफ्तर में ही बंद रखा गया। इसके बाद गुरुवार को उनका शव इसी दफ्तर में संदिग्ध अवस्था में लटकता हुआ मिला। मृतक किसान अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और एक बेटी का रोता-बिलखता परिवार छोड़ गए हैं।
किसान की अचानक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पीड़ित परिवार का साफ तौर पर कहना है कि महज 10 हजार रुपये की वसूली के लिए कंपनी के लोगों ने चंद्रकांत को बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा और फिर हत्या कर शव को लटका दिया ताकि यह आत्महत्या लगे। परिजनों ने मांग की है कि इस मामले में दोषी कर्मचारियों पर तुरंत हत्या का मामला दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का पंचनामा किया और शव को कब्जे में ले लिया। पुलिस ने फिलहाल संदेहास्पद मृत्यु का मामला दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मौत के असली कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने सूखाग्रस्त और आर्थिक तंगी से परेशान किसानों के दरवाजे पर कर्ज वसूली के लिए फाइनेंस कंपनियों के जाने पर सख्त रोक लगा रखी है। इसके बावजूद, निजी फाइनेंस कंपनियां इन सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ा रही हैं और किसानों को प्रताड़ित कर रही हैं।
इस खौफनाक घटना के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी तीव्र आक्रोश देखा जा रहा है। विधायक रोहित पवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी करते हुए इसे अत्यंत गंभीर बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि 8-10 हजार रुपये की वसूली के लिए किसान को दफ्तर में कैद कर उनका उत्पीड़न किया गया और उनकी हत्या कर आत्महत्या का ढोंग रचा गया।
उन्होंने कहा कि राज्य का किसान पहले से ही प्राकृतिक और सरकारी संकटों से जूझ रहा है, और ऐसे में बेलगाम निजी कंपनियों की गुंडागर्दी चरम पर पहुंच गई है। रोहित पवार ने मांग की है कि फाइनेंस कंपनी के गुंडों पर तुरंत हत्या का मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि कोई अन्य कंपनी ऐसा दुस्साहस न कर सके।