अमेजन के AI डेटा सेंटर पर आदित्य ठाकरे का विरोध, बोले- पानी की कटौती के बीच प्रोजेक्ट को बढ़ावा क्यों?

Balkum Majiwada Amazon Project: आदित्य ठाकरे ने ठाणे के बालकुम-माजीवडा में प्रस्तावित अमेज़न AI डेटा सेंटर का विरोध किया है। उन्होंने पानी की किल्लत के बीच इस प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने पर सवाल उठाए है।
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देवेंद्र फडणवीस और आदित्य ठाकरे(सोर्स: डिजाइन फोटो)
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Highlights

  • आदित्य ठाकरे ने ठाणे के अमेज़न AI डेटा सेंटर का कड़ा विरोध किया है।

  • पानी की किल्लत के बीच इस कमर्शियल प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने पर सवाल उठाए हैं।

  • अनिल काकोडकर समिति की रिपोर्ट आने तक प्रोजेक्ट के काम पर रोक लगाने की मांग की।

Aaditya Thackeray On Amazon AI Data Center: महाराष्ट्र में ठाणे शहर के बालकुम-माजीवडा परिसर में प्रस्तावित एआई और अमेज़न डाटा सेंटर प्रोजेक्ट को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद गहरा गया है। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे के विधायक आदित्य ठाकरे ने ठाणे और उरण में हो रही पानी की कटौती तथा रिहाइशी इलाके में एआई डाटा सेंटर थोपे जाने को लेकर राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पर तीखे हमले बोले हैं।

उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सीधा प्रश्न दागा है कि क्या शासन सिर्फ बिल्डरों की ही बात सुनेगा और उनके आर्थिक फायदे के लिए आम जनता के हितों तथा मौलिक जरूरतों की अनदेखी करता रहेगा।

पानी की कटौती बनाम बिल्डरों को प्रोत्साहन

आदित्य ठाकरे ने ठाणे और उरण के निवासियों को हो रही पानी की किल्लत को उजागर करते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि ठाणे और उरण के नागरिकों को आने वाले दिनों में पानी की आपूर्ति नहीं मिलेगी, लेकिन इसके बावजूद सरकार और प्रशासन बिल्डरों और अपने निजी स्वार्थ वाले लोगों का समर्थन लगातार जारी रखेंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि शहर और पर्यावरण के लिए नुकसानदेह साबित होने वाले एआई डाटा सेंटर जैसे प्रोजेक्ट्स का निर्माण कार्य रोकने के लिए प्रशासन बिल्कुल तैयार नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने सवाल पूछा कि आखिर किस सरकारी नीति या नियम के तहत बिल्डर को घनी आबादी वाले इलाके में यह डाटा सेंटर लाने की अनुमति दी गई है।

रिहाइशी इलाके में प्रोजेक्ट का विरोध

ठाणे के बालकुम-माजीवडा क्षेत्र के निवासियों ने इस प्रोजेक्ट के खिलाफ जन-आंदोलन शुरू किया था, जिसमें आदित्य ठाकरे खुद शामिल हुए थे। स्थानीय नागरिकों का स्पष्ट और दृढ़ रुख है कि रिहाइशी इलाके के मध्य में किसी भी हालत में एआई डाटा सेंटर का निर्माण नहीं होना चाहिए।

आदित्य ठाकरे ने सरकार से पूछा कि इस परियोजना को किसी रेड इंडस्ट्री MIDC औद्योगिक क्षेत्र में स्थानांतरित क्यों नहीं किया जाता। नागरिकों के तीव्र विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रशासन ने एक समीक्षा समिति का गठन तो किया, लेकिन आदित्य ठाकरे ने खुलासा किया कि इस समिति के अध्यक्ष को छोड़कर बाकी सभी सदस्य प्रशासन के ही पदसिद्ध अधिकारी हैं, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

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अनिल काकोडकर समिति की रिपोर्ट तक रोक की मांग

22 अक्टूबर 2026 को आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक विस्तृत शासकीय पत्र लिखा। अपने पत्र में उन्होंने 29 सितंबर 2026 को सौंपे गए पूर्व निवेदन और नागरिक निरीक्षण का संदर्भ दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि राज्य में प्रस्तावित डाटा सेंटर परियोजनाओं के प्रभावों का व्यापक अध्ययन करने के लिए राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अनिल काकोडकर की अध्यक्षता में 17 सदस्यीय एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित की गई है।

इस समिति को शासन निर्णय की तारीख से तीन महीने के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपनी है। आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मांग की कि जब तक डॉ. अनिल काकोडकर समिति की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक बालकुम-माजीवडा में प्रस्तावित अमेज़न एआई डाटा सेंटर के काम पर तुरंत रोक लगाई जाए।

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बिजली, पानी, जनरेटर और पर्यावरण संबंधी गंभीर खतरे

आदित्य ठाकरे ने इस प्रोजेक्ट से पैदा होने वाले पर्यावरणीय और ढांचागत खतरों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस भारी-भरकम डाटा सेंटर के संचालन से ठाणे शहर की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था और बिजली वितरण प्रणाली पर अत्यधिक अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। इसके अलावा, विशाल डिज़ल जनरेटरों से निकलने वाले जहरीले उत्सर्जन, अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण, गर्मी का उत्सर्जन और सुरक्षा जैसे कई गंभीर मुद्दों पर अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।

उन्होंने मांग रखी कि 17 सदस्यीय सरकारी समिति में स्थानीय जन-आंदोलन से जुड़ी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए। इसके अलावा, राज्य सरकार की एआई व डाटा सेंटर नीति, पानी व बिजली के आवंटन की योजना, पर्यावरण सुरक्षा के उपाय, स्थानीय निकायों की भूमिका तथा प्रोजेक्ट मंजूरी की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता की आधिकारिक जानकारी जनता के सामने प्रस्तुत की जानी चाहिए।

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