Nagpur News: ट्रैफिक की समस्या से कब मिलेगी निजात? परिवहन नियोजन का अभाव, रोजाना लग रहा मुख्य मार्गों पर जाम
स्मार्ट सिटी नागपुर में ट्रैफिक का योग्य नियोजन नहीं होने से दिन-ब-दिन स्थिति और कठिन बनती जा रही है। इस बीच, आरोप लग रहा है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
- Written By: आंचल लोखंडे
ट्रैफिक की समस्या से कब मिलेगी निजात। (सौजन्यः सोशल मीडिया)
नागपुर: शहर को स्मार्ट सिटी के तौर पर घोषित करने के लिए शासन-प्रशासन प्रयासरत है। लेकिन शहर की ट्रैफिक की व्यवस्था एक विकसित गांव की तरह ही नजर आती है। स्मार्ट सिटी में ट्रैफिक का योग्य नियोजन नहीं होने से दिन-ब-दिन स्थिति और कठिन बनती जा रही है। इस बीच, आरोप लग रहा है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है। वाहनों के साथ शहर की ट्रैफिक की समस्या भी बढ़ती ही जा रही है। इसके प्रबंधन को लेकर पुलिस और महापालिका की तरफ से व्यापक नियोजन नहीं किया जा रहा है।
इसकी वजह से नागरिकों को हर रोज समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कहा जा रहा है कि इस समस्या के निदान के लिए ट्रैफिक पुलिस और मनपा का एकत्रित होकर काम करने की जरूरत है। नए परमिट देकर यात्री वाहन शहर की सड़कों पर उतारे जा रहे हैं। आपली बस और मेट्रो जैसी सार्वजनिक यात्री परिवहन की सुविधा होने के बाद भी लोग अपने निजी वाहनों का उपयोग कर रहे हैं। शहर के फुटपाथ और सड़कें अतिक्रमण से घिरी हुई हैं। महापालिका की तरफ से कार्रवाई करने के बाद भी उनकी स्थिति दो दिनों बाद ‘जैसे थे’ हो जाती है।
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फुटपाथ और सड़कों पर अतिक्रमण की भरमार
शहर के लगभग सभी हिस्सों में फुटपाथ और सड़कों को फेरीवालों द्वारा घिरा पाया जाता है। इसकी वजह से ऐसी स्थिति बन जाती है कि मानों फुटपाथ फेरीवालों के लिए ही बने हैं, इसके कारण पैदल चलने वाले लोगों को मजबूरन सड़कों पर चलना पड़ रहा है। फेरीवाले के अलावा दुकानदार भी अपना माल फुटपाथ पर और सड़कों पर रखते दिखते हैं, यह ट्रैफिक व्यवस्था के बिगड़ने का सबब बन रहे हैं।
सड़क और फुटपाथ अतिक्रमणों से घिर जाने के मामलों को न्यायालय ने गंभीरता से लेते हुए महापालिका को निर्देश दिए, इस पर मनपा की तरफ से कुछ महीनों से शहर में लगातार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है। फिर भी अतिक्रमण कार्रवाई के दूसरे ही दिन स्थिति ‘जैसे थे’ पाई जा रही है।
ई-रिक्शा दे रहा लोगों को तकलीफ
शहर में पहले से ही कुल मिलाकर लगभग 50 हजार से अधिक ऑटो रिक्शा हैं। ऑटो चालकों की दादागीरी से सभी परिचित हैं। इसमें अब ई-रिक्शा ‘शेर पर सवा शेर’ होकर सड़कों पर उतर आए हैं। शिकायत है कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था बिगाड़ने में ई-रिक्शा चालक भी शामिल हैं। ई-रिक्शा चालक मनमानी तरीके से कहीं भी अपनी रिक्शा रोक देते हैं। यात्री वाहनों की तरह ही सभी मार्गों पर ई-रिक्शा चालकों के लिए स्टैंड की व्यवस्था करने की जरूरत है, ताकि यात्री इस स्टैंड पर खड़े रह सकें।
