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कोयले की कीमतों में भारी उछाल, WCL ई-नीलामी में 60% तक बढ़ा प्रीमियम, क्या बंद हो जाएंगे छोटे उद्योग?

WCL Coal Auction: पश्चिम एशिया संकट के बीच कोयले की किल्लत ने उद्योगों की कमर तोड़ दी है। नागपुर में WCL की ई-नीलामी में कीमतें 60% बढ़ीं, जिससे लघु उद्योगों पर बंदी का खतरा मंडराने लगा है।

  • Written By: आकाश मसने
Updated On: Apr 02, 2026 | 01:12 PM

प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)

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West Asia Crisis Impact On Industry: पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच कोयला उद्योगों का दम फूल रहा है। गैस की कमी से कोयला की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। सोमवार को नागपुर के वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड (WCL) ने ई-नीलामी की जिसमें कीमतें मूल दर से 50-60 फीसदी प्रीमियम पर पहुंच गईं। कोयले की कीमतों में इजाफा से छोटे उद्योगों पर संकट गहराने की संभावना प्रबल हो गई है।

जानकारी के अनुसार सोमवार को 5.28 लाख टन कोयले की ई-नीलामी हुई। आम तौर पर औसत कीमत 1,950 से 5,063 रुपये प्रति टन के बीच होती है लेकिन सोमवार को हुई नीलामी में यह 3,600 से 6,500 रुपये प्रति टन के बीच पहुंच गई। प्रीमियम बढ़ने का असर रिटेल बाजार में भी देखने को मिलेगा क्योंकि ट्रेडर्स और ऊंची कीमतों में इसे ग्राहकों तक बेचेंगे।

कोयले पर निर्भरता बढ़ी

ईंधन की कमी के कारण स्थानीय कोयला मार्केट में यह तेजी दर्ज की जा रही है। जानकारों ने बताया कि विदेशी कोयला की आपूर्ति प्रभावित होने और कीमतों में इजाफा होने से कोस्टल क्षेत्र के उद्योग भी स्थानीय माल पर शिफ्ट हो गए हैं। कोस्टल क्षेत्र के लोग पहले विदेशी कोयले पर भी चलते थे लेकिन आपूर्ति कम हो गई और वे स्थानीय कोयले पर टूट पड़े हैं। इस कारण स्थानीय माल की मांग में जोरदार इजाफा हो गया है। डिमांड देखते हुए उद्योग किसी भी कीमत पर इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करना चाहते हैं। यही कारण है कि ई-ऑक्शन में वे बढ़-चढ़कर बोली लगा रहे हैं।

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बड़े एक्टिव, छोटे बेघर हुए

ई-ऑक्शन में बेस प्राइस में पहले कोयला मिल जाता था जिस कारण छोटे उद्योगों को राहत मिलती थी लेकिन बड़े खिलाड़ियों के एक्टिव होने से छोटे बेहाल हो गए हैं। बड़ी कंपनियां ऊंची कीमत सहन कर सकती हैं लेकिन छोटे उद्योगों के लिए 50-60 फीसदी प्रीमियम देना मुश्किल हो जाता है। वर्तमान समय में उन्हें प्रीमियम चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

मार्च में 19.50 लाख टन कोयले का ई-ऑक्शन

मार्च माह में वेकोलि की ओर से 4 बार कोयले का ई-ऑक्शन किया है। 4 ई-ऑक्शन में अलग-अलग मात्रा में कोयले का ऑक्शन हुआ है। कुल 19.50 लाख टन का ऑक्शन किया जा चुका है। उद्योग संचालकों और संगठन के प्रमुखों की मानें तो इस वक्त अगर वेकोलि की ओर से 40 लाख टन कोयले का ऑक्शन भी किया जाता है तो आसानी से लोग खरीद लेंगे। कोई भी अपना उद्योग बंद नहीं करना चाहता है। यही कारण है लोग ई-ऑक्शन में शामिल हो रहे हैं।

महंगे कोयले का खरीदार नहीं

जानकारों ने बताया कि 19.50 लाख टन में से 2.70 लाख टन कोयला कास्ट प्लस खदानों से दिया गया लेकिन इसके लिए लोगों ने बोली नहीं लगाई क्योंकि कास्ट प्लस खदानों से कोयला लेना काफी महंगा साबित होता है। कास्ट प्लस खदानों पर वेकोलि की ओर से उत्पादन लागत पर 112 फीसदी अधिक कीमत ली जाती है। इससे कोयला काफी महंगा हो जाता है।

मार्च माह में हुए ई-ऑक्शन

WCL ने मार्च महीने में चार चरणों में कुल 19.50 लाख टन कोयले की नीलामी की है।

  • 9 मार्च: 3.07 लाख टन
  • 16 मार्च: 5.70 लाख टन
  • 23 मार्च: 5.38 लाख टन
  • 30 मार्च: 5.28 लाख टन

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39 फीसदी टैक्स, सेस

उद्योग के लिए बुनियादी कच्चा माल होने के बाद भी कोयले पर लगभग 39 फीसदी कर, सेस लगता है। जीएसटी, सेस और रायल्टी मिलाकर लोगों को मूल कीमत पर और 39 फीसदी अधिक राशि देनी पड़ती है। इसके ऊपर परिवहन खर्च अलग से देना पड़ता है। यही कारण है कि लोग महंगा कोयला छोड़, सस्ते को प्राथमिकता देते हैं, ताकि उत्पादन लागत कंट्रोल में रहे।

टारगेट का भी दबाव

इस बीच सूत्रों का कहना है कि मार्च में टारगेट पूरा करने के लिए अधिक कोटा जारी किया गया है। वैसे भी वेकोलि टारगेट से पीछे चल रही है। ऐेसे में डिमांड को देखते हुए वेकोलि ने ‘चौका’ मार दिया है। हालांकि इसके बाद भी वेकोलि का डिस्पैच टारगेट पीछे रहने की संभावना जताई जा रही है।

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Published On: Mar 31, 2026 | 12:09 PM

Topics:  

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