नागपुर के 117 गांवों पर मंडराया भीषण जल संकट! अल नीनो के कारण 36% कम बारिश, ZP ने बनाया मास्टर प्लान

Nagpur Water Crisis: नागपुर में अल नीनो के कारण 36% कम बारिश से 117 गांव क्रिटिकल जोन में आए। जिला परिषद ने टैंकरों के बजाय स्थायी समाधान के लिए 6 अधिकारियों की समिति गठित की गई।
Nagpur Critical Zone Villages
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Highlights

  • नागपुर जिले में औसत से 36 फीसदी कम बारिश होने का दावा।

  • जिले के 117 गांवों को क्रिटिकल जोन में रखा गया है।

  • जिला परिषद सीईओ विनायक महामुनि ने कार्ययोजना तैयार की।

  • छह अधिकारियों की समिति गांवों का प्रत्यक्ष निरीक्षण करेगी।

  • पहले चरण में रामटेक तहसील के गांवों का दौरा होगा।

Nagpur Critical Zone Villages: नागपुर जिले में अल नीनो के प्रभाव के चलते जिले में औसत से 36 फीसदी बारिश कम हुई है। अब उसका असर जल संकट के रूप में उभरने लगा है। जिले में ऐसे 117 गांव हैं जिन्हें क्रिटिकल जोन में डाला गया है।

इन गांवों में अगर समय पर उपाययोजना नहीं की गई तो भीषण जल संकट की चपेट में आ सकते हैं। जिला परिषद सीईओ विनायक महामुनि ने इन गांवों के लिए कार्ययोजना तैयार की है।

उनकी अध्यक्षता में 6 अधिकारियों की एक समिति गठित की गई है जो संबंधित गांवों का दौरा कर पानी की किल्लत के कारणों का पता लगाएगी और अस्थायी तौर पर टैंकर आदि से जलापूर्ति की बजाय स्थायी उपाययोजना का प्रयास करेगी।

जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता

समिति के माध्यम से क्रिटिकल जोन के गांवों का प्रत्यक्ष दौरा कर वहां पानी की किल्लत की स्थिति, उपलब्ध जल स्रोत, भूजल स्तर और जलापूर्ति में आने वाली समस्याओं की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।

केवल टैंकर या अन्य अस्थायी वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर निर्भर रहने के बजाय गांवों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए दीर्घकालीन उपाययोजनाओं पर जिला परिषद का जोर रहेगा।

इस संदर्भ में जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता अशोक घोंगे की अध्यक्षता में बैठक हुई जिसमें सभी बीडीओ व उप अभियंता उपस्थित थे।

Nagpur Critical Zone Villages
दिवाली पर नागपुर में मिठाइयों की धूम! शुद्धता से लेकर शुगर-फ्री तक, बाजार में बदली पसंद

प्रत्येक गांव के लिए अलग उपाययोजना

पहले चरण में रामटेक तहसील के क्रिटिकल जोन वाले गांवों का समिति के अधिकारी दौरा करेंगे। इस दौरान पेयजल के उपलब्ध स्रोत, कुओं की स्थिति, भूजल स्तर, जलापूर्ति संबंधों समस्याओं और भविष्य में पानी की जरूरत का अध्ययन किया जाएगा।

प्रत्यक्ष निरीक्षण में सामने आने वाली समस्याओं के आधार पर प्रत्येक गांव के लिए अलग-अलग उपाययोजनाएं तैयार की जाएंगी।

क्रिटिकल जोन से बाहर निकालने के लिए जल संरक्षण, जल भंडारण में वृद्धि और उपलब्ध जलस्रोतों के प्रभावी प्रबंधन जैसी उपाययोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद उसके अनुसार उपाययोजनाओं को अमल में लाने की योजना है।