

Nagpur Wastewater Treatment: नागपुर विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (वीएनआईटी) के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्राध्यापकों ने घरेलू अपशिष्ट जल (वेस्ट वाटर) के शोधन के लिए जियोसिंथेटिक सामग्री आधारित एक अभिनव तकनीक 'जियोवेट' विकसित की है। यह प्रकृति-आधारित (नेचर-बेस्ड) प्रणाली पारंपरिक अपशिष्ट जल शोधन प्रणालियों की तुलना में कम भूमि का उपयोग करते हुए अधिक प्रभावी ढंग से जल शोधन करने में सक्षम है।
इस तकनीक का संशोधन विभाग के डॉ. अमित पडोले, डॉ. कार्तिक बालासुंदरम तथा शोधार्थी विशाल मेश्राम ने किया है। जियोवेट प्रणाली में विशेष रूप से डिजाइन की गई जियोसिंथेटिक सामग्री जैसे जियोसेल, जियोटेक्सटाइल और जियोमेम्ब्रेन का उपयोग आर्द्रभूमि (वेटलैंड) वनस्पतियों के साथ किया गया है जिससे एक कॉम्पैक्ट और टिकाऊ अपशिष्ट जल शोधन प्रक्रिया तैयार होती है।
पारंपरिक प्रणालियों के विपरीत यह तकनीक अपशिष्ट जल को एक अनुकूलित उपचार मार्ग से प्रवाहित करती है जिससे अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता बढ़ाए बिना शोधन क्षमता में वृद्धि होती है। शोधकर्ताओं द्वारा किए गए प्रयोगशाला परीक्षणों में पाया गया कि यह तकनीक अधिक मात्रा में अपशिष्ट जल भार को भी प्रभावी ढंग से संभाल सकती है और उत्कृष्ट शोधन क्षमता बनाए रखती है।
शोध दल का अनुमान है कि यह तकनीक पारंपरिक वेटलैंड आधारित उपचार प्रणालियों की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक भूमि की बचत कर सकती है। इस नवाचार और इसकी विशिष्ट डिजाइन विशेषताओं की सुरक्षा के लिए जियोवेट तकनीक के पेटेंट और डिजाइन पंजीकरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
प्रयोगशाला स्तर पर सफलता के बाद इस तकनीक को फील्ड स्तर पर भी सफलतापूर्वक लागू किया गया है। खुबाला गांव में 10,000 लीटर (10 केएल) क्षमता की जियोवेट आधारित वेटलैंड उपचार इकाई स्थापित की गई है। गांव की नालियों से निकलने वाले घरेलू अपशिष्ट जल को इस इकाई में लाकर प्राकृतिक तरीके से शुद्ध किया जाता है और फिर सुरक्षित रूप से छोड़ा जाता है। वास्तविक परिस्थितियों में किए गए परीक्षणों में इस प्रणाली ने उत्साहजनक परिणाम दिए है।