

Nashik MIDC Industrial Waste Issue: नासिक उच्च न्यायालय के कड़े आदेशों के बाद अब नासिक की जीवन रेखा 'गोदावरी' को औद्योगिक प्रदूषण के जहर से बचाने की कवायद तेज हो गई है। सालपुर और अंबड औद्योगिक क्षेत्रों में रासायनिक अपशिष्ट जल उपचार केंद्र (सीईटीपी) की अनिवार्यता को देखते हुए महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) और गोदावरी नदी उप-समिति के सदस्यों ने संयुक्त रूप से जमीनी निरीक्षण किया।
2018 के अदालती आदेश का पालन: गोदावरी प्रदूषण जनहित याचिका में उच्च न्यायालय ने साल 2018 में ही स्पष्ट कर दिया था कि औद्योगिक इकाइयों का रासायनिक पानी नदियों में जाना तत्काल रुकना चाहिए, वर्तमान में पर्याप्त शोधन व्यवस्था न होने के कारण जहरीला रासायनिक पानी सीधे गोदावरी और उसकी सहायक नदियों में मिल रहा था, जिससे जल प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच गया है।
निरीक्षण के दौरान समिति ने संतोष व्यक्त किया कि आने वाले कुंभ मेले से पहले औद्योगिक क्षेत्रों से होने वाला प्रदूषण पूरी तरह समाप्त हो जाएगा, एमआईडीसी समिति के अध्यक्ष ने आश्वासन दिया है कि सयंत्र का निर्माण एक वर्ष के भीतर पूरा कर लिया जाएगा, निर्माण के बाद अगले तीन महीनों तक एमआईडीसी इसका संचालन स्वयं देखेंगी, जिसके बाद इसे संबंधित एजेंसियों को सौंप दिया जाएगा।
इस दौरे में एमआईडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जयवंत पवार, मुख्य याचिकाकर्ता निशिकांत यंगारे, एमपीसीची के मनीष महाजन और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि कुलकर्णी, गोखले, समीर पटवा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और अभियंता उपस्थित थे।
हम पिछले 5-6 वर्षों से इस ट्रीटमेंट प्लांट के लिए लगातार कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई लड़ रहे थे, लंबे समय के संघर्ष और विषय को लगातार उठाने के बाद आखिरकार काम शुरू हुआ है। अब हमें पक्का भरोसा है कि जल्द ही गोदावरी में रासायनिक पानी का मिलना पूरी तरह बंद हो जाएगा।
-MIDC उप-समित, याचिकाकतों एवं सदस्य, निशिकांत पगारे