

Nagpur Vidhan Parishad Election: नागपुर विधान परिषद चुनाव में भाजपा महायुति और महाविकास आघाडी में बगावत होने से अधिकृत उम्मीदवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बागी उम्मीदवारों को मनाने के लिए नेताओं की ओर से प्रयास शुरू हैं, लेकिन सोमवार रात तक कोई सफलता नहीं मिली।
भाजपा के बागी अनिल सोले ने तो नाम वापस लेने से साफ इनकार कर दिया। उनसे मुलाकात करने प्रदेशाध्यक्ष रविन्द्र चव्हाण शाम को उनके पास गए थे। हालांकि काफी देर तक प्रतीक्षा करने के बाद भी सोले वापस नहीं लौटे। इसके चलते मुलाकात नहीं हो सकी। उन्हें बैरंग ही वापस लौटना पड़ा।
सोले ने मीडिया के सवालों पर कहा कि वे चुनाव लड़ेंगे, यह बात उन्होंने पार्टी नेताओं को पहले ही बता दी थी। उन्होंने किसी भी तरह से अनुशासन का उल्लंघन नहीं किया है और अनुशासन में रहते हुए ही सभी निर्णय लिए हैं।
नामांकन दाखिल करने से पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले से चर्चा की थी। इसलिए नामांकन वापस लेने का सवाल ही नहीं उठता।
नामांकन पत्र दाखिल करते समय भाजपा नेता परिसर में आमना-सामना टालने का प्रयास करते नजर आए। सोले के पहुंचने से कुछ समय पहले ही भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले ने नामांकन पत्र दाखिल किया।
सोले से आमना-सामना टालने के लिए भाजपा के नेता तत्काल वहां से निकल गए। सोले के समर्थक उनके समर्थन में नारे लगाते रहे। सोले ने कहा कि स्नातकों का विश्वास और समर्थन ही उनकी असली ताकत है और वे उनके मुद्दों के लिए लगातार प्रयास करते रहेंगे।
उनके साथ सुनील अग्रवाल, प्रकाश लोनारे, विलास त्रिवेदी, बालासाहब कुलकर्णी, एड। लांजेवार, डॉ। सत्यवान मेश्राम, प्रतीक घोडे, डॉ. श्याम पुंडे सहित रिपब्लिकन पार्टी और भाजयुमो के कुछ कार्यकर्ता उपस्थित थे।
उधर, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि अनिल सोले हमारे नेता हैं। उम्मीदवारी नहीं मिलने से उन्हें थोड़ी निराशा हुई है। मैं स्वयं उनसे चर्चा करूंगा और चुनाव में सहयोग करने का अनुरोध करूंगा।
सोले के बाद लोकजागृति मोर्चा की ओर से एड. रमन सेनाड नामांकन पत्र दाखिल करने पहुंचे. उन्होंने भाजपा से उम्मीदवारी की मांग की थी. पार्टी द्वारा मौका नहीं दिए जाने पर उन्होंने बगावत का झंडा उठा लिया।
एड. रमन सेनाड ने कहा कि वे शुरुआत से ही संघ और भाजपा के स्वयंसेवक व कार्यकर्ता रहे हैं। यह चुनाव पार्टी के चुनाव चिन्ह पर नहीं हो रहा है। इसलिए पार्टी को इस पर विचार करना चाहिए था।
वर्धा जिले के राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार) गुट के बागी नितेश कराले महात्मा ज्योतिबा फुले की वेशभूषा में पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह स्नातकों का चुनाव है और वे मैदान में कायम रहेंगे। वे मविआ उम्मीदवार वंजारी के लिए मुसीबत बन गए हैं।
राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता अनिल देशमुख ने कहा कि नामांकन वापस लेने के लिए नितेश कराले से चर्चा की जाएगी। महाआघाड़ी और मौजूदा राजनीतिक स्थिति को देखते हुए उचित रास्ता निकाला जाएगा।