

Nagpur Mahindra Plant JSW Investment: नागपुर जिला औद्योगिक निवेश में अगुवाई कर रहा है। पिछले दिनों नागपुर और विदर्भ के लिए किए गए करार के तहत लगभग 70 फीसदी कंपनियों को अब तक जमीन उपलब्ध करा दी गई है। 50 फीसदी में काम भी शुरू हो गया है।
अवादा, वारी जैसे बड़े प्रकल्प उत्पादन में भी चले गए हैं और महिंद्रा जल्द जमीन लेकर काम शुरू करने जा रही है। नागपुर और विदर्भ के लिए यह एक बेहतरीन दौर है और एमआईडीसी का पूरा प्रयास है कि जो भी एमओयू हुए हैं उन्हें प्राथमिकताओं के साथ जमीन उपलब्ध करा दी जाए।
नागपुर के साथ ही गड़चिरोली और चंद्रपुर भी अहम डेस्टिनेशन बनकर उभरे हैं। उक्त बातें एमआईडीसी के सीईओ दीपेंद्र सिंह कुशवाह ने कहीं। एमआईडीसी कार्यालय में संवाद साधते हुए कुशवाह ने कहा कि निवेश के आंकड़े काफी बड़े हैं।
इन्हें जमीन भी काफी चाहिए। ऐसे में हमारी पहली प्राथमिकता इन्हें जमीन उपलब्ध कराने की है। अच्छी बात यह है कि प्रत्येक जिले के जिलाधिकारी भी इन बातों को समझ रहे हैं और जल्द से जल्द जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। पदभार संभालने के बाद नागपुर आए कुशवाह ने उद्योग प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक भी की।
उन्होंने कहा कि अतिरिक्त बूटीबोरी औद्योगिक क्षेत्र में महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी को 800 एकड़ जमीन दी जा चुकी है और कंपनी ने इसके लिए भुगतान भी कर दिया है। इस प्लांट को कंपनी जल्द से जल्द शुरू करने के लिए उत्सुक है।
जहां तक बात 1,500 एकड़ जमीन की है, उन्हें संपूर्ण जमीन उपलब्ध करा दी जाएगी। अगले 2 वर्षों में प्रत्यक्ष उत्पादन शुरू हो जाएगा जिससे विदर्भ के हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।
महिंद्रा के साथ-साथ' जेएसडब्ल्यू' कंपनी को भी जल्द ही जमीन सौंपी जाएगी। नागपुर जिले में लगभग 5,500 एकड़ भूमि अधिग्रहण का काम तेजी से चल रहा है। जमीन का अधिग्रहण होते ही जेएसडब्ल्यू को नई जगह पर जमीन दी जाएगी, इसके लिए कंपनी से बातचीत हो चुकी है।
जेएसडब्ल्यू कहीं जाने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि जिले में अलग-अलग हिस्सों में लगभग 5,500 एकड़ जमीन का अधिग्रहण हो रहा है। इसके लिए नोटिफिकेशन भी जारी किया गया है। मुख्य रूप से काटोल, सावनेर, कुही, उमरेड, पारशिवनी जैसे क्षेत्रों में जमीन की डिमांड काफी है। एमआईडीसी इन क्षेत्रों में विस्तार के लिए अध्ययन करेगी।
नागपुर जिला औद्योगिक निवेश में CEO दीपेंद्र सिंह कुशवाह ने कहा कि एमआईडीसी केवल बड़े उद्योग के लिए नहीं बल्कि एमएसएमई उद्योग को बढ़ावा देने का पक्षधर है। यही कारण है कि प्रत्येक औद्योगिक क्षेत्र में एमएसएमई उद्योगों के लिए 20 फीसदी जमीन आरक्षित रखी जाएगी।
हर औद्योगिक क्षेत्र में 20 फीसदी जमीन मिलने से छोटे-बड़े उद्योगों का इको सिस्टम कायम रहेगा और किसी को कोई शिकायत भी नहीं होगी। भविष्य में एमआईडीसी इसी नीति पर आगे बढ़ेगी, एमआईडीसी के प्लग एंड प्ले' मॉडल को उद्यमियों से शानदार प्रतिसाद मिल रहा है।
इस मॉडल को और बढ़ाने की जरूरत है। सफलता के लिए प्लग एंड प्ले मॉडल को और भी अधिक आकर्षक बनाने की पहल होगी, ताकि छोटे उद्यमी या स्टार्टअप कम समय में अपना काम शुरू कर सकें।