नागपुर. सदस्यों की मांग पर विधान परिषद में नियम 260 के तहत विदर्भ के बैकलॉग व विकास पर चर्चा हुई. विप सदस्य मनीषा कायंदे ने कहा कि घने जंगल, रिजर्व फारेस्ट, झुड़पी जंगल, महंगी बिजली विदर्भ विकास में बाधक हैं. बिजली दर कम कर उद्योग लाए जा सकते हैं. टूरिज्म विकास किया जा रहा है जिसका लाभ हो रहा है लेकिन वन्यप्राणी व मानव संघर्ष बढ़ रहा है.
तीर्थक्षेत्रों का विकास किया जाना जरूरी है. शिर्डी आदि कि तरह यहां के स्थलों पर फिल्म या सीरियल बनेगा तो प्रसिद्धि मिलेगी. यहां फिल्म सिटी बनाने की मांग उन्होंने की. उन्होंने कहा कि हर प्रकल्प का विरोध भी नहीं होना चाहिए. वहीं प्रवीण दरेकर ने कहा कि विदर्भ पर चर्चा का प्रस्ताव तो विपक्ष को अपने अंतिम सप्ताह प्रस्ताव में लाना चाहिए लेकिन उसे तो केवल विरोध के लिए विरोध ही करना है.
उन्होंने कहा कांग्रेस ने अनेक वर्ष राज किया लेकिन भाजपा-शिवसेना सरकार ने विदर्भ विकास को गति दी. विदर्भ में शक्कर कारखाने, संतरा, कपास, सोयाबीन प्रोसेस उद्योग लाने चाहिए. धान से इथेनॉल बना सकता है. 2-4 बड़े उद्योग लैंडमार्क बनाएं. उन्होंने कहा कि विदर्भ विकास के लिए टाइम बाउंड प्लानिंग की जरूरत है. टूरिज्म के लिए इंटीग्रेटेड प्लान की जरूरत है. 11 जिलों के लिए एक ही कृषि विवि है जिसके विभाजन की जरूरत है.
राष्ट्रीय समाज पार्टी सदस्य महादेवराव जानकर ने कहा कि विदर्भ का जैसा विकास होना था वह नहीं हुआ. अनुशेष दूर करना है तो विदर्भ को विशेष राज्य बनाएं. आपके प्रधानमंत्री हैं, मुख्यमंत्री हैं. उन्होंने कहा कि पश्चिम महाराष्ट्र के नेताओं से सीखना चाहिए कि कैसे अपने क्षेत्र का विकास किया जाता है. सूतगिरणी, वनोपज आधारित कुटीर उद्योग, आयुर्वेदिक इंडस्ट्री हो सकती है. मेट्रो को चंद्रपुर-गड़चिरोली तक बढ़ाना चाहिए. छोटे-छोटे राज्यों का तेजी से विकास होता है. तेलंगाना की जीडीपी बढ़ गई.
कांग्रेस सदस्य अभिजीत वंजारी ने शीत सत्र में हर दिन के कामकाज में विदर्भ के कितने मुद्दे सदस्यों द्वारा रखे गए उसका हिसाब देते हुए कहा कि दुर्भाग्य से नागपुर के अधिवेशन में ही इनमें से इक्का-दुक्का पर ही चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि 9 दिनों के कामकाज में विदर्भ पर महज 18 प्रतिशत चर्चा हुई. बाकी शेष महाराष्ट्र के विषय ही लिये गए.
उन्होंने विदर्भ वैधानिक विकास महामंडल की अवधि बढ़ाने की मांग की. विरोधी पक्षनेता अंबादास दानवे ने कहा कि सत्तापक्ष सदस्य विदर्भ में हजारों करोड़ रुपयों के प्रोजेक्ट गिनाते हुए विकास का दावा करते हैं. केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी, डीसीएम देवेन्द्र फडणवीस, सुधीर मुनगंटीवार ने जब इतना विकास किया है तो विदर्भ को पिछड़ा क्यों बोल रहे हो. क्यों यहां के किसान आत्महत्या कर रहे हैं. मीडिया को दिखाने के लिए नहीं बल्कि सच में विदर्भ विकास पर चर्चा होनी चाहिए. हम जनता के लिए कार्य करते हैं.
विदर्भ विकास के संदर्भ में सदस्यों द्वारा की गई चर्चा व सवालों के जवाब में डीसीएम देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि नागपुर करार के अनुसार यहां कितने दिन सत्र होना चाहिए और किन कारणों से कितने दिन सत्र होता है इस पर कुछ नहीं कहूंगा लेकिन एक सरकार थी जिसने तो यहां सत्र ही नहीं लिया. उन्होंने कहा कि विपक्ष के अंतिम सप्ताह प्रस्ताव में तो दोनों सदनों में विपक्ष को शामिल ही नहीं किया गया. सत्ता पक्ष द्वारा इस पर चर्चा की मांग पर प्रस्ताव रखा गया.
उन्होंने कहा कि विदर्भ के बैकलॉग को दूर करने व विकास के लिए सरकार कटिबद्ध है और अनेक निर्णय लिये हैं. 29 सिंचन प्रकल्पों को सुधारित शासकीय मान्यता दी है जो 2020 से प्रलंबित थी. 41 प्रकल्पों का प्रस्ताव नया तैयार किया है जिसे जल्द मान्यता देंगे. सारे बांधों की दुरुस्ती कार्यक्रम शुरू कर 7 कार्यों को मान्यता दी है. मामा तालाबों का पुनर्जीवन का काम चालू है जिससे सिंचिन क्षमता बढ़ेगी. 187 पानी उपयोग संस्था कार्यान्वित किया है. अमरावती में 3 बैरक प्रकल्पों को मंजूरी दी है. नागपुर-अमरावती में समृद्धि मार्ग पर लाजिस्टिक पार्क तैयार कर रहे हैं. रामटेक में फेरो अलाय क्लस्टर तैयार कर रहे हैं.
चंद्रपुर में कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट लाया जा रहा है. वस्त्रोद्योग की नई नीति बनाई है. नई खनिज नीति बनाने की घोषणा मुख्यमंत्री ने की जिससे विदर्भ को लाभ होगा. इस नई सरकार ने विदर्भ के जिन जिलों में सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं था सभी जिलों को दिया है. तकनीकी कौशल्य केन्द्र बना रहे हैं. मराठी भाषा विवि बनाने का निर्णय लिया है. कृषि सौर उर्जा के चलते 3 वर्ष में किसानों को 12 घंटे बिजली दी जा सकेगी. कपास व सोयाबीन मूलवर्धन के लिए निधि का प्रावधान किया गया है. उन्होंने कहा कि विदर्भ के विकास के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी.