2 के गोले ने डुबोई सुधाकर कोहले की लुटिया, जानें 16 हजार अवैध वोटों और BJP उम्मीदवार की खराब किस्मत का समीकरण

Nagpur Graduates Constituency Election: नागपुर स्नातक चुनाव में 16 हजार से अधिक अवैध वोटों और 2 के गोले के समीकरण ने कैसे बिगाड़ा बीजेपी उम्मीदवार सुधाकर कोहले का चुनावी गणित, पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
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सुधाकर कोहले(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Highlights

  • नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव में सोलनें 16 हजार से अधिक अवैध मत दर्ज किए गए।

  • भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले के नाम के आगे दो का गोला बना मिला।

  • मतपत्र पर दो का गोला बनाए जाने के कारण लगभग साढ़े नौ हजार वोट अमान्य हुए।

Sudhakar Kohle Nagpur MLC Election Invalid Votes: नागपुर विभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्माया हुआ है। इस चुनाव में मतों की गिनती के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने राजनीतिक विश्लेषकों से लेकर आम जनता तक सभी को चौंका दिया है।

सुशिक्षित मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में 16 हजार से अधिक मत अवैध घोषित किए गए हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं की जागरूकता पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। लेकिन इस पूरी चुनावी जंग में सबसे ज्यादा चर्चा उस 2 के गोले की हो रही है, जिसने पूरी बाजी ही पलट कर रख दी।

क्या है 2 के गोले का समीकरण?

चुनाव प्रक्रिया के दौरान मतपत्र पर प्राथमिकता क्रम दर्ज करने का एक खास तरीका चर्चा के केंद्र में आ गया। बताया जा रहा है कि कई मतपत्रों पर भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले के नाम के सामने प्राथमिकता क्रम 2 लिखा गया था और उसके चारों तरफ एक गोला बनाया गया था। चुनाव नियमों के अनुसार, इस प्रकार गोला बनाकर दर्ज किए गए प्राथमिकता क्रम वाले मतपत्रों को अमान्य यानी अवैध घोषित कर दिया गया।

भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति भी जताई थी। हालांकि, चुनाव नियमों के तहत ही ऐसे मतपत्रों पर निर्णय लिया गया। इस एक अकेली पद्धति के कारण कोहले के नाम के सामने दर्ज करीब 9,500 मतपत्र अवैध घोषित हो गए। इसी तरह, कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी के नाम के सामने भी 5 का प्राथमिकता क्रम गोले के भीतर दर्शाने वाले कुछ मतपत्र सामने आए थे।

2 का गोला, कांग्रेस के लिए बना हाजमोला

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोर-शोर से चल रही है कि मतपत्रों पर 2 लिखकर गोला बनाने का यह तरीका भाजपा पर ही भारी पड़ गया। शुरुआत में यह भरोसा जताया जा रहा था कि भाजपा उम्मीदवार केवल पहली पसंद के मतों के आधार पर ही जीत हासिल कर लेंगे। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर मतपत्र पर 2 लिखने और उसके चारों तरफ गोला बनाने की यह अनोखी पद्धति कहां से आई और किसने फैलाई?

इस तरीके ने भारतीय जनाता पार्टी के वोटों का गणित बिगाड़ दिया और अप्रत्याशित रूप से कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हुआ। इसी वजह से अब राजनीतिक गलियारों में यह जुमला तेजी से तैर रहा है 2 का गोला, कांग्रेस के लिए बना हाजमोला। हालांकि, इन अंदरूनी चर्चाओं और दावों की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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अवैध मतों और दोहरे मतदाताओं पर उठे सवाल

नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में केवल 2 का गोला ही विवाद का कारण नहीं है। देशभर में मतदाता सूची के SIR को लेकर जारी हलचल के बीच नागपुर में करीब 8,400 कथित दोहरे मतदाताओं का मुद्दा भी गरमा चुका है।

इसके अलावा, स्नातकों के इस निर्वाचन क्षेत्र में 16,000 से अधिक वोट अवैध होना एक बड़ा आश्चर्य माना जा रहा है। जहां मतदाता सुशिक्षित और जागरूक माने जाते हैं, वहां इतने बड़े पैमाने पर वोटों का खारिज होना पूरी मतदान प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगाता है। माना जा रहा है कि इस भारी संख्या में अवैध मतों का सबसे बड़ा नुकसान सुधाकर कोहले को ही भुगतना पड़ा।

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भाजपा में अंदरूनी असंतोष और कलह

अवैध मतों के इस समीकरण के साथ-साथ सुधाकर कोहले की किस्मत भी इतनी खराब थी कि भाजपा के भीतर का अंदरूनी घमासान भी सतह पर आ गया। उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया को लेकर पार्टी के भीतर एक खास गुट में गहरा असंतोष था। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच यह सवाल तैर रहा है कि आखिर एक ही नेता को बार-बार अवसर क्यों दिया जाता है? प्रो. सोले की उम्मीदवारी के संदर्भ में भी पार्टी के अंदर यह नाराजगी खुलकर सामने आने आई।

कुल मिलाकर, 16 हजार से अधिक अवैध वोटों के आंकड़े, 9,500 वोटों को ले डूबने वाले 2 के गोले और पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी ने मिलकर भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले के चुनावी गणित को पूरी तरह से प्रभावित किया।