

Maharashtra Street Vending Scheme: महाराष्ट्र सरकार द्वारा हाल ही में जारी किए गए 'पथविक्रेता जीविका संरक्षण और पथविक्री विनियमन योजना 2026' के प्रारूप को लेकर नागपुर के स्ट्रीट वेंडरों और हॉकर प्रतिनिधियों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि प्रारूप फुटपाथ विक्रेताओं के हित में नहीं है।
इससे फुटपाथ दुकानदारों पर अंकुश लगाने का काम किया जा रहा है। टाउन वेडिंग कमेटी (टीवीसी) के सदस्य अब्दुल रज्जाक कुरैशी तथा अन्य हॉकर प्रतिनिधियों ने सोमवार को राज्य के नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव, नागपुर मनपा आयुक्त, जिलाधिकारी तथा पुलिस आयुक्त को एक औपचारिक 'आपत्ति एवं सुझाव पत्र' सौंपा है।
हॉकर प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रस्तावित योजना 'स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग) एक्ट, 2014, महाराष्ट्र रूल्स 2016 तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेदों के खिलाफ है।
30 अप्रैल 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का हवाला देते हुए प्रतिनिधियों ने कहा कि कोर्ट ने भी योजना को अंतिम रूप देने से पहले वेंडरों की आपत्तियों पर विचार करने और कानून की प्रथम व द्वितीय अनुसूची का पालन करने का निर्देश दिया है।
18 वर्ष की आयु सीमा पर आपत्ति ड्राफ्ट योजना में पात्रता के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष रखी गई है। प्रतिनिधियों ने तर्क दिया है कि केंद्रीय अधिनियम 2014 की धारा 4(1) के तहत सर्वेक्षण में पहचाने गए 14 वर्ष पूर्ण कर चुके वेंडर पात्र है। ऐसे में अधिक कठोर शर्त लगाकर वेंडरों को हक से वंचित न किया जाए।
पुनर्वास के बेदखली पर रोक अधिनियम की धारा 3(3) और धारा 18(3) का उल्लेख करते हुए मांग की गई है कि जब तक सर्वे पूरा कर प्रमाण पत्र जारी नहीं होता, किसी भी हॉकर को नहीं हटाया जा सकता, किसी भी निष्कासन या स्थानांतरण से पहले 30 दिनों का लिखित नोटिस देना अनिवार्य है।
जब्ती और शिकायत निवारण प्रक्रिया धारा 19 के तहत मनपा या अतिक्रमण दस्ते द्वारा जब्त किए गए सामान की रसीद सूची तुरंत देना अनिवार्य किया जाए। धारा 20 के तहत एक स्वतंत्र 'शिकायत निवारण एवं विवाद निपटारा समिति का गठन कर उसकी जानकारी सभी वेंडरों को सार्वजनिक की जाए।
प्रतिनिधियों ने नागपुर महानगरपालिका और स्थानीय प्रशासन पर नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि टीवीसी द्वारा लिए गए निर्णयों के खिलाफ अपील करने का अधिकार कानून में है लेकिन मनपा ने अभी तक अपीलीय अधिकारी नियुक्त ही नहीं किया है।
जिन हॉकरों के मतदान के आधार पर टीवीसी गठित हुई उन्हें मनपा आयुक्त के वादों के बावजूद अभी तक लाइसेंस जारी नहीं किए गए। मनपा और ट्रैफिक पुलिस द्वारा हॉकरों को जबरन हटाना और ट्रैफिक, भीड़भाड़ का बहाना बनाकर नो-वेंडिंग जोन घोषित करना गैर-संवैधानिक है।
टाउन वेंडिंग कमेटी में हॉकर प्रतिनिधियों की संख्या केवल 8 है जिससे मनपा प्रशासनिक दबाव में हॉकरों के खिलाफ प्रस्ताव पारित करा लेती है। प्रतिनिधियों ने हॉकर सदस्यों की संख्या बढ़ाने तथा राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले एनजीओ, मनोनीत सदस्यों को हटाने की मांग की है।
यदि टीवीसी अध्यक्ष हॉकर सदस्यों की वाजिब मांगों को नजरअंदाज करते हैं तो समिति के संचालन के लिए सेवानिवृत्त जज या पुलिस अधिकारी को नियुक्त किया जाए।
प्रतिनिधि अब्दुल रज्जाक कुरैशी ने स्पष्ट किया कि हॉकर समुदाय यातायात, पैदल यात्रिय की सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता का पूर्ण सम्मान करता है और वे नियमन के खिलाफ नहीं है। हालांकि नियमन के नाम पर वेंडरों की आजीविका को खत्म करना और उन्हें कानूनी अधिकारों से वंचित करना स्वीकार्य नहीं होगा।
पथविक्रेता योजना, 2026' को अंतिम रूप देने से पहले सभी प्राप्त आपत्तियों का पारदर्शी निपटारा हो।
अधिनियम 2014 और महाराष्ट्र रूल्स 2016 के विपरीत सभी प्रावधानों को ड्राफ्ट से हटाया जाए।
धारा 3(3) के सुरक्षात्मक अधिकारों को किसी भी स्थिति में बाधित न किया जाए।
धारा 10 के अनुसार लाइसेंस रद्द या निलंबित करने से पहले वेंडर को सुनवाई का पूरा अवसर मिले।
स्थानांतरण को अंतिम विकल्प रखा जाए और वेंडरों की आजीविका प्रभावित न होने दी जाए।
प्राकृतिक बाजारों, मौजूदा बाजारों और 50 वर्ष से अधिक पुराने बाजारों के संरक्षण के लिए अलग से विशेष सर्वेक्षण किया जाए।
कुल शहरी आबादी के 2.5% का मानक केवल क्षमता मापने के लिए है; इसे वेंडरों को बेदखल करने का आधार न बनाया जाए।
ड्राफ्ट की हर धारा का राज्य स्तर पर कानूनी परीक्षण कराया जाए।