

Nagpur New Vending Zones Hawker Rehabilitation: नागपुर शहर में बढ़ती अतिक्रमण की समस्या और हॉकर्स के व्यवस्थित पुनर्वास को लेकर निर्णय लेते हुए सिटी में अब 10 नए अत्याधुनिक वेंडिंग जोन बनाने की जानकारी स्थायी समिति सभापति शिवानी दाणी ने दी। मंगलवार को हुई स्थायी समिति की बैठक में इस संदर्भ में निर्णय लिया गया।
इस बैठक में हॉकर्स जोन प्रबंधन, कर्मचारियों की भारी कमी और विकलांगों के नाम पर आवंटित स्टॉल्स में हो रहे बड़े फर्जीवाड़े जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि सिटी में सड़कों के किनारे कुछ नीले रंगों में विकलांगों के शेड आदि दिखाई देते हैं, जबकि अधिकांश विकलांगों को सरकार की ओर से इस तरह का आवंटन नहीं किया गया है। ऐसे में अब इनके खिलाफ कार्रवाई होने जा रही है।
दाणी ने कहा कि केवल अतिक्रमण हटाना एकतरफा कार्रवाई है और जब तक फेरी वालों को हॉकर्स जोन बनाकर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं दी जाती तब तक ऐसी कार्रवाई का कोई ठोस नतीजा नहीं निकलेगा। प्रशासन शुरुआत में 10 नए वेडिंग जोन तैयार कर रहा है, ताकि यह जांचा जा सके कि इस व्यवस्था में क्या कमियां रह जाती हैं और इसे कैसे सुधारा जा सकता है।
पहले शहर में 53 वेडिंग जोन थे जिन्हें बाद में घटाकर 43 कर दिया। इन 43 हॉकर्स जोन को अपडेट और नियमित करने पर समानांतर रूप से काम चल रहा है। बनाए जा रहे 10 नए वेंडिंग जोन में से 2 पुराने 43 जोन का ही हिस्सा हैं, जबकि 8 बिल्कुल नई जगहों की पहचान करके विकसित किए जा रहे हैं।
कर्मचारियों की भारी कमी उन्होंने स्वीकार किया है कि विभाग के पास अतिक्रमण हटाने के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं। यही कारण है कि अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई मुख्य रूप से केवल महल, बर्डी और आईटी पार्क तक ही सीमित होकर रह गई है। किसी बड़े नेता या नगरसेवक के दबाव डालने पर ही टीमें अन्य इलाकों में भेजी जाती हैं।
वर्तमान में प्रत्येक जोन के लिए 10 कर्मचारियों की एक टीम है लेकिन जब किसी इलाके में सघन कार्रवाई करनी होती है तो वहां कम से कम 30 कर्मचारियों की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में एक ही जगह के लिए 3-4 अलग-अलग जोन से टीमों को बुलाकर कार्रवाई करनी पड़ती है।
शहर में विकलांगों को दिए गए नीले स्टॉल्स में भारी भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। उन्होंने कहा कि कई विकलांगों ने अपने स्टॉल दूसरों को किराये पर दे दिए हैं लेकिन
सबसे गंभीर बात यह है कि कई लोगों ने फर्जी दस्तावेज (फर्जी कागजात) बनाकर विकलांगों के लिए आरक्षित इन स्टॉल्स पर कब्जा कर लिया है। नागपुर महानगरपालिका इस मामले में अब सख्त रुख अपनाते हुए इन फर्जी आवंटनों की पहचान करने के लिए जल्द ही एक विशेष अभियान (ड्राइव) चलाने जा रही है।
चौंकाने वाला सच यह भी सामने आया कि जब भी कार्रवाई होने वाली होती है तो विभाग के ही कुछ लोग अतिक्रमणकारियों को पहले से इसकी गुप्त सूचना दे देते हैं।
नियमानुसार यदि किसी का सामान 2 या 3 बार जब्त किया जाता है तो तीसरी बार उस पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए लेकिन हकीकत यह है कि बार-बार वही लोग उसी जगह पर अतिक्रमण करते हैं और महीनों तक कार्रवाई होने के बावजूद आज तक किसी पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। इस संदर्भ में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि एफआईआर के संदर्भ में अध्ययन कर निर्णय लिया जाएगा।