नागपुर महानगरपालिका बड़ा झोल! हाईकोर्ट में खुली पोल,जानें क्या है पूरा मामला

Nagpur News: नागपुर में ध्वनि प्रदूषण पर हाईकोर्ट ने मनपा और पुलिस को फटकार लगाई। ऑनलाइन पोर्टल से शिकायत का विकल्प ही गायब मिला, जिससे नागरिकों के शांति से जीने के मौलिक अधिकार पर सवाल उठे हैं।
Nagpur High Court Noise Pollution
ध्वनि प्रदूषण से परेशान आदमीप्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI
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Nagpur High Court Noise Pollution: नागपुर ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के तमाम दावों और अदालती आश्वासनों के बावजूद महानगर पालिका की निष्क्रियता और लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई। सिटी में नागरिकों को ध्वनि प्रदूषण की शिकायत दर्ज कराने के लिए कोई सुलभ ऑनलाइन व्यवस्था तक उपलब्ध नहीं है जिससे प्रशासन के दावों की पोल खुल गई।

यह गंभीर खुलासा सोमवार को हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान हुआ। अदालत ने इस ढुलमुल रवैये पर तीव्र नाराजगी व्यक्त करते हुए पुलिस विभाग और मनपा प्रशासन को अब तक दर्ज शिकायतों पर की गई कार्रवाई का पूरा लेखा-जोखा पेश करने का आदेश दिया।

ध्वनि प्रदूषण का विकल्प ही गायब

नागपुर जिले में ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के तमाम दावों और अदालती आश्वासनों के बावजूद महानगर पालिका की ध्वनि प्रदूषण को लेकर हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की गईं।

इस पर सोमवार को एक साथ हुई सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया गया कि महानगर पालिका के ऑनलाइन शिकायत निवारण पोर्टल पर पर्यावरण विभाग के तहत शिकायत करने के लिए 'वायु प्रदूषण' और 'जलाशय व नदियां' जैसी श्रेणियां तो मौजूद हैं लेकिन 'ध्वनि प्रदूषण' की शिकायत दर्ज करने के लिए कोई विकल्प ही नहीं दिया गया है। इस तकनीकी चूक और प्रशासनिक अनदेखी के कारण त्रस्त नागरिकों के लिए शिकायत दर्ज कराना लगभग असंभव हो गया है।

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शांति से जीने के मौलिक अधिकार का हनन

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में इस बात पर जोर दिया है कि अत्यधिक और अनियंत्रित शोर के कारण नागरिकों के स्वास्थ्य पर बेहद घातक और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ रहे हैं।

इसके अलावा यह स्थिति संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिकों के 'शांति से जीने के मौलिक अधिकार' का भी सीधा हनन है।

इसके बावजूद प्रशासन का इस संवेदनशील मुद्दे के प्रति रवैया बेहद निराशाजनक और उदासीन बना हुआ है।

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