शिवणगांव में हुआ आखिरी मतदान, पुनर्वसन के बाद बदला समीकरण, समाज भवन और स्कूल तोड़े गए
Nagpur के शिवणगांव में पुनर्वसन और तोड़फोड़ के बीच महानगरपालिका चुनाव का आखिरी मतदान हुआ, जहां घटती आबादी, बदले राजनीतिक समीकरण और मतदान केंद्र की दूरी ने लोकतंत्र की कठिन परीक्षा ली।
- Written By: आंचल लोखंडे
नागपुर मनपा चुनाव (सौ. सोशल मीडिया )
Shivangaon Last Voting: ‘मराठा तितुका मेळवावा’ फिल्म के गीत “आखिरचा हा तुला दंडवत” (यह तुझे अंतिम दंडवत) की पंक्तियां गुरुवार को हुए महानगरपालिका मतदान दिवस पर शिवणगांव में सजीव होती नजर आईं। शहर की सीमा पर बसा यह गांव, जिसे शहर ने कभी पूरी तरह अपनाया नहीं, आज अपने अस्तित्व के अंतिम पड़ाव पर खड़ा दिखाई दे रहा है।
महानगरपालिका के प्रभाग क्रमांक 38 का यह इलाका नाममात्र को शहर का हिस्सा है, लेकिन वास्तविकता में विकास से कोसों दूर रहा है। शिवणगांव कभी मिहान और कार्गो परियोजना से प्रभावित लोगों के आंदोलनों का केंद्र रहा। कुछ समय तक शांति रही, लेकिन अब हवाई अड्डा विस्तार का कार्य फिर से शुरू हो गया है।
2700 से घटकर बचे केवल 700 मतदाता
जिला प्रशासन ने यहां के परिवारों को नोटिस जारी किए और मुआवजा देकर पुनर्वसन की प्रक्रिया शुरू की। इसके चलते आधे से अधिक परिवार गांव छोड़ चुके हैं। अब उंगलियों पर गिने जाने लायक ही कुछ परिवार शिवणगांव का अस्तित्व बचाए हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार का महानगरपालिका चुनाव शिवणगांव के लिए अंतिम साबित हो सकता है। कभी जहां गांव में 2700 मतदाता थे, अब केवल 650 से 700 मतदाता ही शेष रह गए हैं। टूटे घर, जगह-जगह पड़ा मलबा और सुनसान सड़कें शिवणगांव की पीड़ा को साफ बयां करती हैं।
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लोकतंत्र की परीक्षा हुई कठिन
हर वर्ष मतदान गांव स्थित महानगरपालिका स्कूल में होता था, लेकिन इस बार गांव के दो स्कूल और तुकडोजी महाराज समाज भवन तोड़ दिए जाने के कारण मतदान के लिए दो किलोमीटर दूर स्थित एक इंजीनियरिंग कॉलेज को केंद्र बनाया गया। स्थिति और जटिल तब हो गई जब कुछ परिवारों का आधा मतदान शिवणगांव (प्रभाग 38) और आधा चिंचभुवन (प्रभाग 35) में दर्ज पाया गया। इसके अलावा महानगरपालिका द्वारा शिवणगांव की बस सेवा पूरी तरह बंद कर दिए जाने से वृद्ध, महिलाएं और दिव्यांग मतदाताओं के लिए मतदान करना बेहद कठिन हो गया। कई लोग अपने मताधिकार का प्रयोग ही नहीं कर सके।
राजनीतिक समीकरण बदले
पहले शिवणगांव कांग्रेस समर्थक मतदाताओं का बहुल क्षेत्र था, लेकिन पुनर्वसन के चलते बड़ी संख्या में कांग्रेस समर्थक मतदाता चिंचभुवन में बस गए हैं। इसके कारण कांग्रेस का एक बड़ा वोट बैंक प्रभाग 38 से प्रभाग 35 में स्थानांतरित हो गया है। माना जा रहा है कि इसका सीधा असर इस बार के चुनाव परिणामों पर पड़ेगा। शेष बचे मतदाताओं में भाजपा समर्थकों की संख्या अधिक होने से प्रभाग 38 में भाजपा को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
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“मतदान किया, फिर भी शिवणगांव खत्म होगा”
स्थानीय ग्रामीण दत्ता भुसारी ने कहा कि “शिवणगांव का अस्तित्व ही जल्द समाप्त होने वाला है। इसलिए यहां के नागरिकों का शत-प्रतिशत मतदान पुनर्वसन स्थल पर होना चाहिए था। हम मतदान किसके लिए और क्यों करें? जो गांव कल अस्तित्व में ही नहीं रहेगा, उसके विकास का सपना क्यों देखें?”
नागपुर से नवभारत लाइव के लिए राघवेंद्र टोकेकर की रिपोर्ट
