नागपुर HC के कड़े संकेत: शंकर नगर में अवैध फूड जॉइंट्स पर कसा शिकंजा; कहा-अवैध हुआ तो कोई निर्माण नहीं बचेगा

Nagpur High Court PIL: शंकर नगर समेत शहर के कई हिस्सों में फूड जॉइंट्स और कथित अवैध निर्माणों को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण को कानूनी संरक्षण नहीं मिल सकता।
Strong signals from Nagpur HC: Crackdown on illegal food joints in Shankar Nagar; court states that no illegal structure will be spared.
शंकर नगर, अवैध निर्माण, प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सौजन्य AI)
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Nagpur Shankar Nagar Illegal Construction: नागपुर शहर के अलग-अलग हिस्सों के साथ ही विशेष रूप से शंकर नगर परिसर में फूड जॉइंट्स, रेस्टोरेंट्स और अन्य ऐसे प्रतिष्ठानों के कारण आम नागरिकों को हो रही परेशानी को लेकर ललित हारोडे की ओर से हाई कोर्ट में फौजदारी जनहित याचिका दायर की गई।

याचिका पर बुधवार को सुनवाई के दौरान जहां नोटिस धारकों की ओर से मध्यस्थ अर्जी दायर की गई, वहीं न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने स्पष्ट किया कि यदि कानूनन अवैध होगा, तो निर्माण कार्य नहीं बच सकेगा। नियमों के अनुसार निर्माण कार्य को किसी तरह की मुश्किल नहीं है। मनपा की ओर से अधि। जेमीनी कासट और मध्यस्थ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता फिरदौस मिर्जा ने पैरवी की।

अवैध निर्माण मामले में सरकार से जवाब तलब, हाई कोर्ट ने दिए कड़े संकेत

सरकारी पक्ष ने मांगा समय याचिका पर गत सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को हाई कोर्ट की नाराजगी झेलनी पड़ी थी। कोर्ट ने अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर सरकार द्वारा कार्रवाई पर रोक लगाए जाने पर स्पष्टीकरण मांगा था।

इसके लिए हाई कोर्ट की ओर से समय भी दिया गया था, किंतु बुधवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से फिर समय देने का अनुरोध किया गया जिसे स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने सुनवाई स्थगित तो कर दी, किंतु मनपा के अनुसार अवैध निर्माणकर्ताओं की मध्यस्थता अर्जी पर कड़े संकेत दिए।

मनपा की ओर से पैरवी कर रहे अधि। जेमीनी कासट का मानना था कि अवैध निर्माण कार्य के खिलाफ एमआरटी की धारा 53 के तहत जोनल कार्यालय की ओर से नोटिस जारी किया था किंतु सम्पत्तिधारक ने इसके खिलाफ सरकार के पास अपील दायर की। इसके बाद सरकार ने रोक लगा दी। इस संदर्भमें कड़ी आपत्ति दर्ज करते हुए कोर्ट ने कहा कि एमआरटीपी कानून अंतर्गत सरकार ने किस अधिकार क्षेत्र में रोक लगाई? इसका जवाब देने के आदेश भी दिए थे।

सरकार को दिया था अल्टीमेटम

इस गंभीर मामले में न्यायालय ने राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार के सामने दी स्पष्ट शर्तें रखी हैं, जिसके अनुसार या तो सरकार वह कानूनी प्रावधान दिखाए जिसके तहत उसे धारा 53 के नोटिसों की कार्यवाही में दखल देने और स्टे लगाने का अधिकार प्राप्त है या फिर यदि सरकार के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है, तो वह अपनी इस गलती को सुधारे, अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार अपना अधिकार क्षेत्र साबित करने या अपनी गलती सुधारने में विफल रहती है, तो अदालत उस अधिकारी के खिलाफ सीधे तौर पर कार्रवाई कर सकती है जिसने इस अपील को स्वीकार किया और रोक का आदेश पारित किया था।

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