सोनम वांगचुक पर पुलिस एक्शन को संजय राउत ने बताया तानाशाही, कहा- उद्धव के आंदोलन से ध्यान भटकाने की साजिश
Sanjay Raut On Sonam Wangchuk: संजय राउत ने सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल भेजने पर केंद्र को घेरा। आरोप लगाया कि नागपुर में उद्धव ठाकरे के 'राम रक्षा' आंदोलन से ध्यान भटकाने के लिए यह कार्रवाई हुई।
- Written By: आकाश मसने
संजय राउत व सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाती पुलिस (सोर्स: सोशल मीडिया)
Sanjay Raut Attacks Modi Government: नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 21 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। शनिवार को दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर उन्हें जबरन अस्पताल भेज दिया। इस घटना के बाद सियासी बवाल मच गया है। इसे लेकर शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोनम वांगचुक के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को तानाशाही करार दिया।
संजय राउत ने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक पर हुई कार्रवाई जानबूझकर महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना (यूबीटी) के राम रक्षा आंदोलन से लोगों और मीडिया का ध्यान हटाने के लिए की गई।
21 दिनों से अनशन पर बैठे है सोनम वांगचुक
संजय राउत ने कहा कि सरकार उन मूल मुद्दों को हल करने में पूरी तरह विफल रही, जिनको लेकर सोनम वांगचुक 21 दिनों से अनशन पर बैठे थे। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह तानाशाही है। सोनम वांगचुक की मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी, लेकिन सरकार ने उनकी मांगों पर कोई कदम नहीं उठाया। इसके बजाय, देश के लाखों छात्रों के भविष्य के लिए अपनी जान तक दांव पर लगाने को तैयार वांगचुक को जबरन पुलिस ने उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया। इससे साफ पता चलता है कि देश को किस तरह की तानाशाही की ओर ले जाया जा रहा है।
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Nagpur, Maharashtra: Shiv Sena (UBT) MP Sanjay Raut says, “The police picked up Sonam Wangchuk. What else can the police do? The police are slaves of the government. Sonam Wangchuk has been on a hunger strike for more than 20 days and has sacrificed food. Why is this happening?… pic.twitter.com/I1fHy4Sevu — IANS (@ians_india) July 18, 2026
तानाशाही के अंत की शुरुवात..
@Wangchuk66 pic.twitter.com/5zV07oKLRA — Sanjay Raut (@rautsanjay61) July 18, 2026
संजय राउत ने मोदी सरकार पर बोला हमला
संजय राउत ने केंद्र की मोदी सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि सरकार को सच में वांगचुक की चिंता होती तो अनशन शुरू होने के समय ही उनकी मांगों पर बातचीत करती। सरकार ने कई हफ्तों तक पूरी तरह चुप्पी साधे रखी और अब अचानक पुलिस कार्रवाई की गई।
उद्धव ठाकरे के आंदोलन से ध्यान हटाने सोनम वांगचुक पर हुई कार्रवाई
शिवसेना (यूबीटी) नेता ने दिल्ली में सोनम वांगचुक पर हुई कार्रवाई को सीधे महाराष्ट्र की राजनीति से जोड़ते हुए दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में नागपुर में होने वाले राम रक्षा आंदोलन से लोगों का ध्यान हटाया जा सके। यह आंदोलन अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और लूट के खिलाफ आयोजित किया गया है।
संजय राउत ने कहा कि सोनम वांगचुक के खिलाफ की गई यह कार्रवाई इसलिए की गई ताकि नागपुर में शुरू होने वाले बड़े एल्गार आंदोलन से मीडिया और जनता का ध्यान भटकाया जा सके। उन्हें जबरन हिरासत में लेकर अस्पताल भेजा गया ताकि सुर्खियां बदल जाएं।
संजय राउत ने स्पष्ट किया कि सरकार की रणनीति से उनकी पार्टी पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने बताया कि उद्धव ठाकरे कार्यक्रम के लिए रवाना हो चुके हैं। वह दोपहर नागपुर पहुंचेंगे और शाम 4 बजे रामनगर स्थित राम मंदिर पहुंचकर आंदोलन का नेतृत्व करेंगे।
सुप्रिया सुले ने सोनम वांगचुक से की मुलाकात
इससे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए उसे बेहद असंवेदनशील बताया था। उन्होंने जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके से मुलाकात की और अपना समर्थन दिया।
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सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील
सुप्रिया सुले ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक देश के लिए अमूल्य हैं। सरकार का रवैया पूरी तरह असंवेदनशील है। सत्ता पक्ष से किसी को उनके पास जाकर बातचीत शुरू करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
सुप्रिया सुले ने यह भी बताया था कि सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके के समर्थन में जंतर-मंतर जाने के उनके फैसले की बारामती लोकसभा क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने सराहना की। उन्होंने कहा कि उन्होंने वांगचुक से स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन खत्म करने का अनुरोध किया, लेकिन वह अपनी मांगें पूरी होने तक डटे रहने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
