समालखा में 79वें निरंकारी संत समागम का अंतिम दिन, महाराष्ट्र के 20 हजार सेवादारों के समर्पण की चर्चा

Nirankari Sant Samagam 2026 Final Day: समालखा में 79वें निरंकारी संत समागम का अंतिम दिन; सीएम नायब सिंह सैनी ने लिया आशीर्वाद, महाराष्ट्र के 20 हजार सेवादारों के समर्पण की रही खास चर्चा।
Samalkha 79th Nirankari Sant Samagam CM Nayab Singh
समालखा में समागम के दौरान(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Highlights

  • समालखा में चार दिवसीय 79वें निरंकारी संत समागम का अंतिम दिन आज।

  • मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने समागम में पहुंचकर सतगुरु से आशीर्वाद प्राप्त किया।

  • मुंबई और महाराष्ट्र से पहुंचे बीस हजार सेवादारों के समर्पण की रही चर्चा।

Samalkha 79th Nirankari Sant Samagam Maharashtra Pilgrims: हरियाणा के समालखा स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल में आयोजित चार दिवसीय 79वां सालाना निरंकारी संत समागम में जागृति अपार भक्ति, आस्था और विश्वबंधुत्व का दिव्य संदेश दिया गया। आज समागम का अंतिम दिन है। समागम आस्था की अनूठी सुगंध और भक्ति की मिठास से सराबोर रहा, जहां देश-विदेश से उमड़े लाखों श्रद्धालुओं ने सत्संग का आनंद लिया।

इस पावन अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने समागम में पहुंचकर निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं राजपिता रमित जी महाराज के पावन दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस विशाल आध्यात्मिक महाकुंभ की भव्य व्यवस्थाओं में मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र से आए 20 हजार सेवादारों का निस्वार्थ समर्पण और श्रमदान मुख्य आकर्षण का केंद्र बना रहा।

CM नायब सैनी ने लिया सतगुरु का आशीर्वाद

समागम में पहुंचे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज और निरंकारी राजपिता रमित जी महाराज को आदरपूर्वक शॉल भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया। सत्संग में सहभागी बनने के उपरांत मुख्यमंत्री ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि संत समागम में उपस्थित होकर सतगुरु का आशीर्वाद पाना उनके लिए परम सौभाग्य की बात है। उन्होंने साझा किया कि सत्संग के आध्यात्मिक विचारों को सुनकर उनके मन को असीम शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति हुई है।

मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि निरंकारी संत समागम हमें आत्मिक शांति के साथ-साथ प्रेम, करुणा और निस्वार्थ सेवा भाव को अपने जीवन में ढालने की प्रेरणा देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे दिव्य आयोजन मानव समाज को आपसी भेदभाव और संकीर्णताओं से ऊपर उठाकर समस्त मानवता के कल्याण और विश्वबंधुत्व की भावना के साथ आगे बढ़ने का सच्चा मार्ग दिखाते हैं।

दिग्गज नेताओं और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी

इस दिव्य अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ हरियाणा प्रदेश के कई शीर्ष जनप्रतिनिधि और गणमान्य अतिथि भी मौजूद रहे। इनमें मुख्य रूप से शामिल रहे:

  • हरविंद्र कल्याण (हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष)

  • कृष्ण लाल पंवार (विकास एवं पंचायत मंत्री)

  • प्रमोद विज (पानीपत शहरी विधायक)

  • मनमोहन भड़ाना (समालखा विधायक)

  • निखिल मदान (सोनीपत विधायक)

  • देवेंद्र कादियान

इन सभी नेताओं ने सतगुरु माता सुदीक्षा जी के चरणों में नतमस्तक होकर आशीर्वाद प्राप्त किया और व्यक्त किया कि समागम से उन्हें समाज में प्रेम, सेवा और मानवीय मूल्यों के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है।

महाराष्ट्र के 20 हजार सेवादारों का श्रमदान

79वें निरंकारी संत समागम को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने में महाराष्ट्र के सेवादारों ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई। मुंबई शहर तथा महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे करीब 20,000 सेवादारों ने महीनों पहले से ही समागम स्थल की तैयारियों में अपना निस्वार्थ योगदान दिया।

सेवादारों के अनथक प्रयास और समर्पण का ही परिणाम रहा कि समालखा में विशालकाय पंडाल बनकर तैयार हुए, जिससे लाखों श्रद्धालुओं को बिना किसी असुविधा के सत्संग में बैठने का अवसर मिला। समागम स्थल पर आधुनिक LED स्क्रीन स्थापित की गईं, ताकि विशाल मैदान के हर कोने में मौजूद भक्त सतगुरु के पावन प्रवचनों और भजनों का सीधा प्रसारण देख और सुन सकें। इसके अलावा, सेवादारों की रचनात्मकता और सामूहिक प्रयास से निर्मित कलात्मक मुख्य स्वागत द्वार भी समागम स्थल पर श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा।

सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज का संदेश

समागम के दौरान सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने जागृति विषय पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आध्यात्मिक चेतना का मार्गदर्शन किया। माता जी ने फरमाया कि केवल ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर लेना ही आध्यात्मिक जागृति का अंतिम पड़ाव नहीं है, बल्कि यह तो उस मार्ग की वास्तविक शुरुआत है।

Samalkha 79th Nirankari Sant Samagam CM Nayab Singh
समालखा में 79वां निरंकारी संत समागम 23 से, महाराष्ट्र के 20 हजार सेवादार तैयारियों में जुटे, उमड़ेंगे भक्त

सतगुरु माता के संदेश की मुख्य बातें

  • व्यावहारिक आचरण: वास्तविक जागृति तब घटित होती है, जब मनुष्य अपने जीवन के प्रत्येक पल में निराकार परमात्मा की अनुभूति करते हुए प्रेम, विश्वास और नम्रता के साथ जीवन व्यतीत करता है।

  • कर्मों में उतारना: सत्संग में केवल शारीरिक रूप से सम्मिलित होना काफी नहीं है, बल्कि वहां से प्राप्त ज्ञान को अपने दैनिक व्यवहार और कर्मों में उतारना अनिवार्य है।

  • सच्चा समर्पण: सेवा और समर्पण का भाव किसी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्चे हृदय से होना चाहिए; मनुष्य की वाणी और कर्मों में झलकने वाली अच्छाई ही उसकी वास्तविक जागृति की पहचान है।

  • परोपकार: परमात्मा द्वारा प्रदत्त साधनों का उपयोग मानवता की सेवा में करें और जीवन की हर परिस्थिति में मन की शांति व सहजता बनाए रखें।

Samalkha 79th Nirankari Sant Samagam CM Nayab Singh
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सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सेवादल का योगदान

समागम के दौरान केवल प्रवचनों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि खेलकूद, शारीरिक व्यायाम, स्किट, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और लघु नाटिकाओं के माध्यम से भी अनुशासन, आपसी सहयोग और निस्वार्थ सेवा का प्रेरणादायी संदेश दिया गया। निरंकारी सेवादल ने अपनी प्रस्तुतियों से यह सिद्ध किया कि सेवा केवल एक तय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पावन शैली है, जिससे समाज में प्रेम और सद्भाव को मजबूती मिलती है।

इस अवसर पर संत निरंकारी सेवादल के मुख्य संचालक एस. के. जुनेजा ने दुनिया भर से आए सेवादल स्वयंसेवकों की ओर से सतगुरु माता जी के पावन चरणों में श्रद्धा अर्पित की। लालसोट क्षेत्र सहित देश-विदेश के दूर-दराज हिस्सों से आए लाखों भक्तों ने विभिन्न सेवाओं में हिस्सा लेकर विश्वबंधुत्व और सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल पेश की।

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