

New RTO Rules In Nagpur: कहते हैं 'जब जागो तभी सवेरा' लेकिन हमारी व्यवस्था तब जागती है जब सड़कें हादसों से लाल और चौराहे अव्यवस्था से जाम हो चुके होते हैं। शहरों में 'पर्यावरण और जेब अनुकूल' का ढिंढोरा पीटकर हजारों ई-रिक्शा सड़कों पर उतार दिए गए लेकिन उन्हें चलाने वालों की योग्यता परखना सरकार वर्षों तक भूल ही गई।
अब जब अनुभवहीन ई-रिक्शा चालकों के कारनामों से हादसे चरम पर पहुंचे तो महाराष्ट्र परिवहन विभाग को अचानक नींद से जागकर 'ऐतिहासिक कदम' उठाने का ख्याल आया।
प्रादेशिक परिवहन कार्यालय (RTO) ने नया फरमान जारी किया कि अब बिना ट्रेनिंग ई-रिक्शा की चाबी हाथ में नहीं मिलेगी। यानी जो काम ई-रिक्शा का पहिया घूमने के पहले ही दिन हो जाना चाहिए था उसे सैकड़ों हादसों के बाद 'मास्टर स्ट्रोक' बनाकर पेश किया जा रहा है।
सह परिवहन आयुक्त संदेश चव्हाण द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के मुताबिक अब ई-रिक्शा चालकों को भी कमर्शियल लाइसेंस के लिए मान्यता प्राप्त मोटर ड्राइविंग स्कूल से 10 दिनों की ट्रेनिंग का 'डिप्लोमा' लेना होगा। इसमें 5 घंटे का प्रैक्टिकल भी शामिल है।
सवाल यह है कि जो व्यवस्था सालों तक बिना लाइसेंस और बिना बैज के फर्राटा भरते ई-रिक्शों को देखकर आंखें मूंदे बैठी थी, क्या वह 5 घंटे की ट्रेनिंग से सड़कों को अचानक सुरक्षित बना देगी? फिर भी नियम तो नियम है, बैज नहीं तो कार्रवाई होगी अगर चेकिंग स्टाफ को फुर्सत मिली तो।
सब जानते हैं कि शहर के ज्यादातर ड्राइविंग स्कूल किस तरह 'बिना गाड़ी हुए' सर्टिफिकेट बांटने की दुकान चलाते हैं। अब क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय ने चेतावनी दी है कि 'वाहन' पोर्टल पर गलत जानकारी दी या फर्जी सर्टिफिकेट बांटा तो कानूनी स्तर पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी।
अब यह देखना होगा कि कागजों पर कड़े दिखने वाले इस चाबुक का असर सड़कों पर कितना दिखता है या यह भी सिर्फ एक और सर्कुलर बनकर फाइलों में दफन हो जाएगा।
इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रादेशिक परिवहन विभाग ने देर से ही सही लेकिन ई-रिक्शा चालकों को 'पवनपुत्र हनुमान' की श्रेणी से बाहर निकालकर कमर्शियल ड्राइवर की श्रेणी में ला दिया।
हालांकि उक्त गाइडलाइन में अब भी कई पेंच है लेकिन यदि गंभीरता से इस ओर काम किया जाये तो इस सकारात्मक प्रयास नागपुर ही नहीं, पूरे राज्य के शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर बेधड़क, बिना अनुभव दौड़ायें जा रहे ई-रिक्शा से होने वाली दुर्घटनाओं पर थोड़ी लगाम कसी जा सकी है।
खुद की गाड़ी लाओ: हर ट्रेनिंग
सेंटर के पास कम से कम एक ई-रिक्शा होना चाहिए।
कागजात पूरे रखो: फिटनेस और इंश्योरेंस का हिसाब दुरुस्त होना चाहिए।
जांच के बाद ही लाइसेंस : 10 दिन का 'फॉर्म 5' या '5-बी' मिलेगा, जिसकी आरटीओ गहन जांच करेगा।