

नागपुर में RSS के शताब्दी वर्ष विजयादशमी उत्सव का आयोजन।
मोहन भागवत ने किया शस्त्र पूजन, संजय गुप्ता बने मुख्य अतिथि।
1925 में विजयादशमी पर हुई थी RSS की स्थापना।
RSS Centenary Vijayadashami Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का शताब्दी वर्ष विजयदशमी उत्सव मंगलवार, 20 अक्टूबर को नागपुर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने पारंपरिक विधि से शस्त्र पूजन किया। कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय पहचान और स्वदेशी को अपनाने के महत्व पर विचार रखे। यह आयोजन संघ के शताब्दी वर्ष के समापन अवसर से भी जुड़ा है। इस कार्यक्रम में संघ की परंपराओं और भविष्य की प्राथमिकताओं पर जोर दिया गया।
विजयदशमी के अवसर पर RSS का वार्षिक उत्सव आयोजित करने और शस्त्र पूजन करने की परंपरा रही है। इस वर्ष भी नागपुर में इसी परंपरा का निर्वहन किया गया। मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन के बाद कार्यक्रम को संबोधित किया। संघ के लिए यह आयोजन संगठन की स्थापना से जुड़ी परंपराओं और विचारों को सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर है।
मोहन भागवत ने कहा कि RSS पिछले 100 वर्षों से भारत को उसकी अपनी पहचान, संस्कृति और परंपराओं के आधार पर संगठित और मजबूत बनाने का काम कर रहा है। उनके संबोधन में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को समझने और उन्हें सामाजिक जीवन में महत्व देने की बात सामने आई।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में नागपुर शहर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। संघ की स्थापना विजयादशमी के दिन हुई थी। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण दशहरा संगठन के लिए विशेष महत्व रखता है। शताब्दी वर्ष का आयोजन इसी स्थापना यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर से जुड़ा है।
शस्त्र पूजन से पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर स्थित स्मृति मंदिर में संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। स्मृति मंदिर संघ के संस्थापक और संगठन के इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। विजयादशमी पर यहां श्रद्धांजलि अर्पित करना संघ के वार्षिक कार्यक्रम का हिस्सा है।
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने बंगाल के विचारक राज नारायण बसु का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज नारायण बसु के जन्म के 200 वर्ष पूरे हो रहे हैं। भागवत के अनुसार, राज नारायण बसु ने हिंदू मेले की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य स्वदेशी मेलों के माध्यम से लोगों को अपनी संस्कृति और पहचान के प्रति जागरूक करना था। उनके इस उल्लेख के जरिए भागवत ने सांस्कृतिक जागरूकता और अपनी परंपराओं के महत्व को रेखांकित किया।
सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा, विभिन्न माध्यमों से प्राप्त जानकारी बिना उचित-अनुचित का विवेक किये नई पीढ़ी ग्रहण करती है। उसके दुष्परिणामों का अनुभव होने के बाद विभिन्न देशों ने कुछ अनुशासन और निर्बन्ध लागू किये हैं।
हमारे अपने देश में भी इस प्रकार की आवश्यकता, विशेषत: ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को लेकर, समाज में अनुभव की जा रही है। शासन प्रशासन को इसका विचार करना चाहिये।
विजयादशमी के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश के विभिन्न हिस्सों में पथ संचलन और अन्य कार्यक्रम आयोजित करता है। इन आयोजनों के माध्यम से स्वयंसेवक संगठन की परंपराओं और गतिविधियों में भाग लेते हैं। नागपुर का वार्षिक विजयादशमी समारोह संघ के प्रमुख आयोजनों में शामिल है। इस वर्ष शताब्दी के अवसर ने कार्यक्रम को और विशेष बना दिया है।