

मिल मजदूरों के लिए 15 लाख रुपये तक के घर खरीदने की तैयारी।
निजी प्रोजेक्टों में जमीन की शर्त 30 एकड़ से घटाकर 1 एकड़ की गई।
आवासीय क्षेत्रों में FSI 2.5 से बढ़ाकर 3, म्हाडा खरीदेगा तैयार फ्लैट।
Mumbai Textile Mill Workers Housing Policy: मुंबई में बंद पड़ी और बीमार कपड़ा मिलों के पात्र मजदूरों व उनके वारिसों को एमएमआर में आशियाना मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार के गृहनिर्माण विभाग ने नियमों में बड़ा सुधार किया है। 15 मार्च 2024 के अपने मूल जीआर में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए सरकार ने सोमवार को नया आदेश जारी किया।
नए फैसले के तहत अब निजी विकासकों के लिए जमीन की बड़ी शर्त को घटा दिया गया है। साथ ही परियोजना में एफएसआई को बढ़ाकर घरों के निर्माण की गति तेज करने का रास्ता साफ किया गया है। इतना ही नहीं 15 लाख रुपए में तैयार घरों को देने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। इससे मुंबई के मिल मजदूरों को जल्द ही सस्ते घर मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
बता दें कि वर्ष 1982 की ऐतिहासिक हड़ताल के कारण मुंबई शहर की 58 कपड़ा मिलें बंद अथवा बीमार घोषित हो गई थीं। इन मिलों के हजारों पात्र मजदूरों और उनके वारिसों को किफायती घर दिलाने के लिए लंबे समय से विभिन्न श्रमिक संगठन लगातार राज्य सरकार से मांग कर रहे थे। मिल मजदूरों को त्वरित आवास उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने विकल्पों पर विचार करने के बाद मूल नीति में आंशिक संशोधन करने का निर्णय लिया है।
जारी जीआर के मुख्य प्रावधानों के तहत अब मॉडल दो और तीन के अंतर्गत निजी विकासकों द्वारा मंजूर लेआउट पर घर बनाने के लिए पहले लागू 30 एकड़ जमीन की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। अब कम से कम एक एकड़ जमीन विकासक के खुद के मालिकाना हक वाली या अहस्तांतरणीय पावर ऑफ अटॉर्नी वाली होने पर भी काम शुरू हो सकेगा। इससे छोटे भूखंडों पर भी कामगारों के लिए परियोजनाओं की राह आसान होगी।
मिल मजदूरों के लिए सस्ते घरों की परियोजनाओं को रफ्तार देने और उन्हें व्यावहारिक बनाने के लिए सरकार ने निर्माण नियमों में ढील दी है। आवासीय क्षेत्रों में अब बिल्डरों को ढाई के स्थान पर तीन एफएसआई की अनुमति दी गई है, जिससे एक ही भूखंड पर पहले से अधिक मकान बनाए जा सकेंगे।
वहीं, हरित और गैर-विकास क्षेत्रों में एक एफएसआई तक निर्माण की मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही मजदूरों को घरों के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े, इसके लिए सरकार ने तुरंत तैयार फ्लैट खरीदने का फैसला किया है।
मिल मजदूरों को तुरंत छत मुहैया कराने के लिए सरकार ने म्हाडा के जरिए निजी बिल्डरों से तैयार फ्लैट खरीदने की योजना तैयार की है।
नए नियमों के अनुसार मुंबई महानगर क्षेत्र के जिन प्रोजेक्टों में कम से कम 100 तैयार फ्लैट उपलब्ध हैं, उनके विकासकों से म्हाडा रुचि पत्र आमंत्रित करेगा।
इसके तहत फ्लैट की कीमत अधिकतम 15 लाख रुपए या इलाके की रेडीरेकनर दर में से जो भी कम होगी, उसी दर पर बिल्डरों से मकान खरीदे जाएंगे।
सरकार के इस कदम से मिल मजदूरों को बिना किसी लंबे इंतजार के रेडी-टू-मूव मकान मिलने का रास्ता साफ होगा।
अपने संवैधानिक पद का उपयोग हम कामगारों के लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए निश्चित तौर पर करेंगे। एनटीसी मिल मजदूरों की समस्याओं को लेकर हम आगामी नवंबर महीने में एक बार फिर केंद्र सरकार से मुलाकात करेंगे और समाधान निकालने का प्रयास करेंगे।
सचिन अहिर, उपसभापति, महाराष्ट्र विधान परिषद
हमने सरकार को सुझाव दिया था कि 66 एफएसआई में बढ़ोतरी करके मुबई के भीतर ही व्यवस्था की जाए, ताकि बाकी बचे करीब 1.10 लाख से 1.12 लाख मिल मजदूरों को आशियाना मिल सके। मिल मजदूर मुंबई के बाहर जाने को तैयार नहीं हैं। हम इस पूरे जीआर का अध्ययन कर सरकार से इस मसले और अत्यधिक कीमत पर दोबारा बातचीत करेंगे। फिलहाल, मुंबई में अब तक करीब 16,000 मिल मजदूरों को घर आवंटित किए जा चुके हैं।
गोविंदराव मोहिते, महासचिव, राष्ट्रीय मिल मजदूर संघ
हमारी स्पष्ट और प्रमुख मांग यही है मिल कामगारों मुंबई शहर भीतर ही घर मिलना चाहिए। मुंबई से बाहर कल्याण, वांगणी या दूरदराज के इलाकों में 15 लाख रुपए की कीमत मजदूरों के लिए बहुत ज्यादा है। पहले मुंबई में साढ़े सात लाख और फिर साढ़े नौ लाख रुपए में घर दिए गए थे। ऐसे में 15 लाख रुपए तय करना मजदूरों की जेब पर भारी पड़ेगा।
सुनिल अहिर, नेता, राष्ट्रीय मिल मजदूर संघ व बेस्ट समिति सदस्य