रील्स बनाने से कोई एक्टर नहीं बनता...नागपुर में पंकज कपूर ने युवाओं को दिखाया आईना, शाहिद को लेकर कही बड़ी बात

Pankaj Kapur Nagpur: नागपुर में पंकज कपूर का युवाओं को मंत्र- रील्स बनाने से कोई अभिनेता नहीं बनता। अभिनय के 50 साल, एनएसडी के अनुभव और बेटे शाहिद कपूर पर गर्व।
Legendary actor Pankaj Kapur shares his 50-year acting journey in Nagpur. He emphasizes hard work over social media reels and expresses pride in son Shahid Kapoor.
अभिनेता पंकज कपूर (सौजन्य-नवभारत)
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Pankaj Kapur Acting Journey: ‘रंगमंच, दूरदर्शन और सिनेमा भले ही अलग-अलग माध्यम हों, लेकिन अभिनय का सार एक ही रहता है। मुझे मीडिया माध्यमों से ज्यादा अभिनय से प्रेम है।’ यह विचार अभिनेता पंकज कपूर (Pankaj Kapur) ने व्यक्त किया। नागपुर एडिशन ऑफ पिफ और मेराकी थिएटर्स के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को वनामती सभागृह में आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम में पंकज कपूर ने अपने 50 वर्षों के अभिनय सफर के अनुभव को साझा किया।

कार्यक्रम का संचालन एंकर अजेय गंपावर ने किया, जिन्होंने विभिन्न विषयों पर उनसे संवाद किया। शुरुआत में विदर्भ साहित्य संघ के अध्यक्ष डॉ. गिरीश गांधी, पूर्व विभागीय आयुक्त अनूप कुमार के हाथों पंकज कपूर का सम्मान किया गया। इस दौरान उनके पांच दशक लंबे अभिनय करिअर पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई।

युवाओं को संबोधित करते हुए पंकज कपूर (Pankaj Kapur) ने कहा कि केवल सोशल मीडिया पर रील्स बनाकर कोई अभिनेता नहीं बन सकता। इसके लिए गहन अध्ययन, निरंतर अभ्यास और कड़ी मेहनत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में मिली शिक्षा और सांस्कृतिक वातावरण ने उनके व्यक्तित्व और कला को निखारने में अहम भूमिका निभाई।

बचपन से ही अभिनय का जुनून

लुधियाना में बचपन से ही अभिनय के प्रति लगाव रखने वाले पंकज कपूर ने बताया कि उनके पिता का ‘जीतकर ही लौटना’ वाला मंत्र उनके जीवन की प्रेरणा बना। एनएसडी के दौरान उन्हें नाटक, कविता और उर्दू-अवधी भाषा का गहन अध्ययन करने का अवसर मिला, जिसने उनके अभिनय और लेखन को नई दिशा दी। अभिनय में गहराई लाने के लिए पढ़ने की आदत बेहद जरूरी है।

मेहनत, संयम और निरंतर अभ्यास के बिना सफलता संभव नहीं है। साथ ही उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों की रुचियों को समझें और उन्हें प्रोत्साहित करें। दिलचस्प रूप से अपने करिअर की लोकप्रियता के बावजूद पंकज कपूर ने स्वीकार किया कि उन्हें ‘करमचंद’ और ‘रुका हुआ फैसला’ जैसी भूमिकाएं उतनी पसंद नहीं हैं। उनका मानना है कि वे इन किरदारों को और बेहतर तरीके से निभा सकते थे।

शाहिद कपूर पर जताया गर्व

अपने बेटे शाहिद कपूर के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह एक बेहतरीन अभिनेता है और अपनी भूमिकाओं के चयन में साहस दिखाते हैं। कम उम्र में विविध प्रयोग करना उनके विकास का संकेत है। अपनी कहानी और निर्देशन में बनी फिल्म ‘मौसम’ के बारे में उन्होंने बताया कि इस फिल्म से उन्हें रचनात्मक संतुष्टि तो मिली, लेकिन आर्थिक सफलता अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही। उन्होंने दोहराया कि सिनेमा कला और व्यापार का संतुलन है। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कला प्रेमी, विद्यार्थी और रंगकर्मी उपस्थित थे।

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