मनपा कर्मचारी करेंगे काम बंद आंदोलन, संविधान चौक पर किया तीव्र प्रदर्शन
- Written By: नवभारत डेस्क
नागपुर. मनपा कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अलावा शिक्षकों को 7वां वेतन आयोग तो लागू किया गया किंतु इसकी बकाया निधि अब तक नहीं दी गई. यहां तक कि छठवें वेतन आयोग का भी बकाया चल रहा है. इसी तरह से कर्मचारियों की कई न्यायोचित मांगों को लेकर कई बार प्रदर्शन किए गए किंतु अब तक न्याय नहीं दिया गया है. दीपावली होने के बावजूद मनपा ने 7वें वेतन के बकाया की राशि का भुगतान शुरू नहीं किया गया. अत: दीपावली के पूर्व भुगतान नहीं किया गया तो निकट भविष्य में काम बंद आंदोलन करने की चेतावनी मनपा कर्मचारियों की एकमात्र अधिकृत संगठन राष्ट्रीय नागपुर कॉर्पोरेशन एम्प्लाइज एसोसिएशन (इंटक) ने दी. मंगलवार को संगठन की ओर से संविधान चौक पर तीव्र प्रदर्शन किया गया.
वेतन में लागू करें महंगाई भत्ता
संगठन के अध्यक्ष सुरेन्द्र टिंगने ने कहा कि सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार कर्मचारियों को 11 प्रतिशत दर से वेतन में महंगाई भत्ता दिया जाना चाहिए. संगठन की ओर से काफी समय पहले काम बंद आंदोलन किया गया था. आंदोलन के कारण स्थिति बिगड़ जाने से तत्कालीन महापौर के कक्ष में संगठन के साथ बैठक कराई गई जिसमें बकाया का भुगतान करने की सहमति जताई गई थी. बाद में संगठन के पदाधिकारी बदल जाने के बाद सत्तापक्ष और प्रशासन ने मिलकर इस फैसले को ही बदल दिया. आंदोलन में सुरेन्द्र टिंगने, रंजन नलोडे, ईश्वर मेश्राम, प्रवीण तंत्रपाले, सुधीर फटिंग, प्रकाश चमके, धर्मदास मेश्राम, मिलिंद चकोले, बाबा श्रीखंडे, संजय महल्ले, हेमराज शिंदेकर, बलीराम शेंडे, गौतम गेडाम, योगेश बोरकर, बाबा बंसोड, संजय गटिकने, अभय अप्पनवार, मंजुश्री कान्हेरे, शितल जांभुकर, सुषमा नायडू, शांता उके, संध्या डाखोले आदि शामिल थे.
सेवा शर्तों का पालन करें
- आंदोलनकर्ताओं ने कहा कि न केवल छठवें वेतन आयोग का बकाया है बल्कि 7वें वेतन आयोग का भी 16 माह का बकाया है. 7वें वेतन आयोग का बकाया चरणबद्ध तरीके से नियमित कर्मचारी, शिक्षकों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को देने की घोषणा की गई थी.
- 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार 10,20 और 30 वर्षों की आश्वासित प्रगति योजना लागू की जानी चाहिए.
- एवजदार सफाई कर्मचारियों को नियमति करने की 20 वर्ष की शर्त रद्द कर अधिसंख्य पद नियमित आस्थापना पर लेने तथा उन्हें लाड पागे समिति की सिफारिशें लागू कर वारसा हक अबाधित रखने की मांग भी की.
